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Delhi AIIMS: कोहनी को जोड़ेगा स्वदेशी इंप्लांट, मरीजों पर जल्द होगा ट्रायल; बेहतर होगी गुणवत्ता

Thu, 22 Feb 2024 08:37 AM IST
अनुज कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 22 Feb 2024 08:37 AM IST
सार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर स्वदेशी इंप्लांट तैयार किया है। परीक्षण शवों पर हो चुका है। इसे जल्द ही मरीजों पर शुरू किया जाएगा।

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indigenous implant will be installed to repair elbow at AIIMS
दिल्ली एम्स - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कोहनी को जोड़ने के लिए स्वदेशी इंप्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए एम्स ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर इंप्लांट तैयार किया है। एम्स में इस इंप्लांट का परीक्षण शवों पर हो चुका है। जल्द ही मरीजों पर भी इसका परीक्षण शुरू हो जाएगा। परीक्षण सफल होने पर इंप्लांट का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। 

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विशेषज्ञों की माने तो स्वदेशी इंप्लांट न केवल भारतीय मरीजों की जरूरत के आधार पर तैयार किया गया है, बल्कि इनके दाम और गुणवत्ता भी बेहतर होगी। एम्स के स्पाइन सर्जन डॉ. भावुक गर्ग का कहना है कि एम्स ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर कोहनी के प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाला स्वदेशी इंप्लांट तैयार किया है। इनका कैडेवरिक ट्रायल पूरा कर लिया गया है। अब जल्द ही इसे जिंदा लोगों पर ट्रायल के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी सफलता के बाद इसे मरीजों में इस्तेमाल किया जाएगा। 
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एम्स में हर माह 10 ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें कोहनी के प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। अभी इस प्रत्यारोपण के लिए कोहनी में जो इंप्लांट लगाया जाता है वह विदेशों से मंगाया जाता है। यह काफी  महंगा होता है। 

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विदेशी इंप्लांट फिक्स करने में आती है दिक्कत
एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि विदेश से आने वाले इंप्लांट उन देशों के मरीजों के आधार पर तैयार होते हैं। ऐसे में वह इंप्लांट भारत के मरीजों में फिट होने में दिक्कत करते हैं। स्वदेशी तकनीक से तैयार करने के लिए टाइटेनियम का इस्तेमाल किया गया है। यह इंप्लांट के लिए सबसे सुरक्षित व बेहतर धातु है। एमआरआई करवाने के दौरान इसमें दिक्कत नहीं आती। 

भ्रष्टाचार रोकने के लिए एम्स ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर, 29 फरवरी से होगा चालू 
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एम्स ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। एम्स ने मरीजों और उनके रिश्तेदारों के साथ बातचीत के दौरान यह पाया कि कुछ मरीजों को दवाओं की आपूर्ति करने, एम्स के बाहर जांच में मदद करने या अन्य अस्पतालों में रेफर करने की आड़ में दलाल उनसे ठगी कर रहे है। इससे निपटने के लिए विशेष उपाय शुरू किए जाएंगे। इसके लिए एक नंबर 9355023969 जारी किया गया है, जो 29 फरवरी से चालू हो जाएगा।

इंप्लांट के परिणाम बेहतर
आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर तैयार हुए इंप्लांट के परिणाम बेहतर आए हैं। डॉक्टरों का कहना   है कि शवों पर किए गए ट्रायल के दौरान इसके परिणाम बेहतर पाए गए। इसमें गुणवत्ता, मूवमेंट,   फिटिंग सहित अन्य सभी का ट्रायल किया है। इसके नतीजे बेहतर आए है। अब क्लीनिकल आकलन के लिए मरीजों पर इसका ट्रायल किया जाएगा।

एम्स में होती है सर्जरी 
एम्स में कोहनी के अलावा घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण के लिए सर्जरी होती है। डॉक्टरों की माने तो देशभर में हर साल हजारों इंप्लांट की जरूरत होती है। भारत में इनके निर्माण से न केवल मरीजों को फायदा होगा, बल्कि मरीजों की रिकवरी और गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

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