विदेशियों की तुलना में ज्यादा शराब पीते हैं भारतीय टीनएजर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विदेशों की तुलना में ज्यादा शराब पीते हैं भारत के टीनएजर्स। शराब से दो सौ तरह की बीमारियों का खतरा है। स्कूली बच्चों में 13-14 साल के तो स्लम एरिया के बच्चे 11-12 वर्ष के बच्चे शामिल हो रहे हैं।
लीवर फेल के पचास फीसदी मरीज और सड़क हादसों में चालीस फीसदी शराब कारण है। एम्स के विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में बिहार पर चर्चा, करते हुए कहा कि शराबबंदी से नहीं होगा समस्या का समाधान। बल्कि राष्ट्रीय नीति बनाने पर काम करना होगा।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मनोचिकित्सा विभाग की और से शनिवार को शराब की वजह से होने वाली बीमारियों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने शराब से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी।
डॉ. एसके खंडेलवाल ने बताया कि शराब के चलते दो सौ बीमारियों का खतरा लगा रहता है। यह शरीर के अंग खराब करने के साथ-साथ याददाश्त पर भी प्रभाव डालती है। इसके अलावा शराब के चलते दिल, लिवर, किडनी, ब्रेन स्ट्रोक, डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है।
डॉ. खंडेलवाल के मुताबिक, यूरोपीय देशों में शराब सेवन घट रहा है। जबकि भारत में यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में टीनएजर्स इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।
इसकी रोकथाम के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। भारत में कुल लिवर फेल में से चालीस फीसदी मरीज शराब पीने से बीमारी की चपेट में आए। वहीं, डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि भारत में कुल सड़क हादसों में से पचास फीसदी शराब पीकर गाड़ी चलाने से होते हैं।
ज्यादा अल्कोहल वाली शराब के दाम बढ़ाने होंगे
विशेषज्ञों ने बिहार में शराबबंदी पर भी चर्चा की। डॉक्टरों का कहना था कि शराबबंदी से कुछ हासिल नहीं होगा। क्योंकि आंध्र प्रदेश, हरियाणा, मिजोरम में यह पहले से लागू है। लेकिन शराब पीने वालों का आंकड़ा तो कम नहीं हुआ, बल्कि तस्करी और बड़े अपराध बढ़ गए।
विशेषज्ञों का कहना था कि शराबबंदी से कोई हल नहीं निकलेगा। बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की जरूरत है, जिसमें राज्यों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। विदेशों में शराब में अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती है, लेकिन उसके दाम अधिक होते हैं।
जिसमें अल्कोहल की मात्रा कम होगी, वह सस्ती होगी। जबकि भारत में इसका उलट है। यहां अल्कोहल की मात्रा कम होगी तो महंगी और अल्कोहल ज्यादा तो शराब सस्ती। विशेषज्ञों ने कहा कि ज्यादा अल्कोहल वाली शराब के दाम बढ़ाने होंगे, ताकि लोग कम से कम खरीदें।