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एक भारतीय कलाकार जिसने अमेरिका में जमाई धाक
दीपक पांडे/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Fri, 07 Feb 2014 10:26 AM IST
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फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में पहली बार शिरकत कर रहे रामुरामादेव न सिर्फ भारत में बल्कि अमेरिकन जमीन पर भी भारतीय पेंटिंग के रंग घोल रहे है।
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जयपुर के रहने वाले रामुरामादेव की हैंड मेड पेंटिंग पर्यटकों को अपनी तरफ खीच लेती है। भगवान कृष्णलीला की शानदार पेंटिंग बनाने के लिए रामुरामादेव को वर्ष 2010 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की तरफ से राष्ट्रीय अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
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रामुरामादेव के स्टॉल न सिर्फ कृष्णालीला की बल्कि राजा महाराजाओं की भी आकर्षक पेंटिंग लगी हुई है। इनके स्टॉल पर सबसे मंहगी पेंटिंग एक लाख रुपये की है। अभी तक इस पेंटिंग के क द्रदान तो बहुत आए, लेकिन खरीददार नहीं मिला। लेकिन उन्हें विश्वास है कि अगले पांच दिनों में उनकी यह पेंटिंग बिक जाएगी।
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रामुरामादेव ने बताया कि वह पहले कागज पर लकीरों को उकरेते है। फिर उसमे रंग भर पेंटिंग तैयार करते है। उनके अनुसार लकीरों के बिना भारतीय चित्रकला अधूरी है।
वहीं इसकी पेंटिंग में लकीरों की सरचंना भी भारतीय कलाकारों ने की है। उन्होंने बताया कि उनके खानदान का न सिर्फ पेंटिंग बनाने में नाम है बल्कि यह परिवार अमेरिकन आर्ट इंस्टीट्यूट साथ मिल कर गौमूत्र से बनने वाले गोगली रंग पर भी रिसर्च कर रहा है।
उन्होंने बताया कि यह रंग भारत से लुप्त हो चुका है। इस रंग से पहले राजा महाराजाओं की पेंटिंग तैयार की जाती थी। उन्होंने बताया कि वह शिकागों में अमेरिकन आर्ट इंस्टीट्यूट में बच्चों को पेंटिंग सीखाने का काम करते है। लगभग 200 बच्चे हर वर्ष उनसे पेंटिंग सीखने के लिए आते है। ऐसे में भारतीय पेंटिंग का अमेरिका में महत्व बढ़ रहा है। जुलाई में अमेरिकन आर्ट फेस्टिवल में वह शिरकत करने जा रहे है।