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जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा भारत, कहा- पेरिस समझौते पर असहमति दूर की जाए
Fri, 09 Oct 2020 12:32 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 09 Oct 2020 12:32 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : pexels.com
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पूर्व केंद्रीय मंत्री व जी-20 शिखर सम्मेलन के शेरपा सुरेश प्रभु का कहना है कि जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पेरिस समझौते की असहमतियों को दूर किया जाना चाहिए। उनका संकेत अमेरिका के इस समझौते से अलग होने की तरफ था।
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नई दिल्ली में वर्चुअल कांफ्रेंस ‘बी-20 ग्लोबल डायलॉग इन इंडिया’ को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इसका आयोजन आरआईएस, सीआईआई एवं इंडियन साइंस अकादमी द्वारा संयुक्त रूप से किया।
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उन्होंने कहा कि जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत अपनी प्राथमिकताएं तय करेगा लेकिन जो कार्य अब तक अध्यक्ष रहते हुए अन्य देशों ने किया है, उसे भी आगे बढ़ाएगा। दरअसल भारत 2022 में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
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सुरेश प्रभु ने कहा कि भारत हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से कार्य करता हैं। इस मौके पर विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) राहुल छाबड़ा ने कहा कि उन्होंने बी-20 रिपोर्ट को जी-20 को सौंपते हुए कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को पुनजीर्वित करते हुए आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाए जाने की जरूरत है। साथ ही उत्पादक क्षेत्रों को भी नए सिरे से खड़ा करना होगा।
विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) के महानिदेशक प्रो.सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि आरआईएस विभिन्न पक्षकारों जैसे व्यवसाय, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री तथा सिविल सोसायटी के बीच विचारों के आदान-प्रदान में संलग्न है। ताकि नीति निर्मातओं के लिए जी-20 स्तर पर इन्हें अमल में लाने में आसानी हो। इसी सिलसिले में जी-20 डायजेस्ट का प्रकाशन भी शामिल है जिसका मकसद 2022 के भारत की अध्यक्षता के लिए उपयोगी जानकारी जुटाना है। आरआईएस के चैयरमैन मोहन कुमार ने भी इसमें शिरकत की।
बता दें कि बी-20 जी-20 देशों का बिजनेस समुदाय है जो जी-20 देशों को नीति निर्माण के लिए आवश्यक इनपुट देता है। कुछ अन्य समूह भी इसमें बने हैं जैसे टी-20 जो थिंक टैंक है। डब्ल्यू-20 जो महिलाओं का समूह है।
इसी प्रकार नागरिक संगठनों का समूह सी-20, युवाओं का वाई-20, साइंस का एस-20, श्रम का एल-20, शहरों का यू-20 समह शामिल है। हर साल जी-20 की अध्यक्षता किसी एक देश को सौंपी जाती है। अभी यह सऊदी अरब के पास है तथा अगले साल इटली पास होगी।