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‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मिलेगी ‘ऑक्सीजन’, वेंडर कंपनियों के लिए खुले दरवाजे

Tue, 10 Jul 2018 07:29 AM IST
योगेश शर्मा, अमर उजाला, नोएडा
योगेश शर्मा, अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 10 Jul 2018 07:29 AM IST
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 India and South Korea business relationship will strengthen of Make in India campaign
Make in India
भारत और दक्षिण कोरिया के कारोबारी रिश्ते "मेक इन इंडिया" अभियान के लिए ऑक्सीजन का काम करेंगे। दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री का तोहफा नोएडा को मिला है, लेकिन इसका सीधा फायदा मंदी की मार से जूझ रही मोबाइल पार्ट्स वेंडर कंपनियों को भी मिलेगा। साथ ही कई और विदेशी कंपनियों के एनसीआर में स्थापित होने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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फिलहाल, सैमसंग के लिए 30 वेंडर इकाइयां काम करती हैं। इनमें से 15 कोरिया की हैं। सैमसंग इंडिया ने भारत को मोबाइल फोन एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उसकी योजना मोबाइल फोन निर्माण की वर्तमान क्षमता को सालाना दोगुना यानी 12 करोड़ तक करने की है। जानकारों की मानें तो नए सप्लायर तैयार किए बिना ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा।
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ऐसे में सैमसंग के विस्तार के साथ इससे जुड़ी कुछ और कोरियाई वेंडर इकाइयां नोएडा-ग्रेटर नोएडा सहित एनसीआर में स्थापित हो सकती हैं। दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल ऐसी इकाइयों की संख्या 100 से 150 बताई जाती है, जो मोबाइल निर्माता कंपनियों के लिए अलग-अलग पार्ट्स तैयार करती हैं। इनमें कैप, चार्जर, बॉक्स, ईयर फोन से लेकर बैटरी तक शामिल है। 
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इंपोर्ट ड्यूटी से मिलेगा बढ़ावा
मेड इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए इस साल अप्रैल में विदेशों से आयात होने वाले मोबाइल पार्ट्स पर सरकार ने 10 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। इसके बाद से ही भारतीय बाजार पर कब्जा जमाने की कोशिश में जुटी तमाम मोबाइल निर्माता कंपनियों ने पूरी तरह से मेड इन इंडिया पर जोर देना शुरू कर दिया। पहले मोबाइल के ज्यादातर पार्ट्स चीन और ताइवान से आयात किए जाते थे, जिन्हें अब भारतीय बाजार में ही तैयार करने का लक्ष्य है।


2020 तक कंपनी पूरा करेगी लक्ष्य
सैमसंग इंडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, फिलहाल नोएडा यूनिट में 6.8 करोड़ मोबाइल फोन सालाना तैयार किए जाते हैं। कंपनी अपने विस्तार के साथ ही इस क्षमता को बढ़ाकर 12 करोड़ करने जा रही है। इस लक्ष्य को 2020 तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है।


 
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