केंद्र की रोक के बावजूद मेट्रो के बढ़े किराये की होगी जांच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली सरकार एवं केंद्र सरकार के बीच मेट्रो रेल किराये में हुई बढ़ोतरी के मामले में टकराव बढ़ गया है। केंद्र सरकार के मना करने के बावजूद दिल्ली सरकार ने मेट्रो रेल किराए बढ़ोतरी की जांच कराने का एलान किया है। दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने साजिश के तहत मेट्रो रेल के किराये में बढ़ोतरी की है।
यही वजह है कि केंद्र सरकार किराया बढ़ोतरी की जांच नहीं होने दे रही है। दिल्ली सचिवालय में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विकास मंत्री गोपाल राय और परिवहन मंत्री कैलाश गहलोट के साथ शनिवार को संवाददाता सम्मेलन कर मेट्रो रेल किराये में बढ़ोतरी के मामले में केंद्र सरकार पर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मेट्रो रेल के किराये में बढ़ोतरी की है। इस कारण दिल्ली सरकार ने किराये बढ़ोतरी के मामले की जांच कराने का निर्णय लिया था, लेकिन केंद्र सरकार उसे जांच करने से रोक रही है।
दिल्ली सरकार एवं केंद्र सरकार की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है
अधिकारी ने पत्र में लिखा है कि मेट्रो रेल में दिल्ली सरकार एवं केंद्र सरकार की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इस कारण दिल्ली सरकार को अपने स्तर पर जांच कराने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मेट्रो रेल किरायेे में बढ़ोतरी जांच हर हाल में होगी।
दिल्ली सरकार के साथ-साथ विधानसभा को भी जांच कराने का हक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेट्रो रेल किराए बढ़ोतरी के मामले में भाजपा उसी लाइन पर काम कर रही है, जैसे कांग्रेस ने बिजली कंपनियों के मामले में रुख अख्तियार किया था।
बिजली के बढ़ती दरों पर लगाई थी रोक
मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में पहले बिजली के दाम बढ़ाए जा रहे थे, लेकिन जब आप सरकार ने जांच करवाई तो मालूम हुआ कि बिजल कंपनियों पर आठ हजार करोड़ बकाया है। उसके बाद से आज तक बिजली के दाम नहीं बढ़ने दिए। उन्हें उम्मीद है कि मेट्रो रेल की जांच के बाद भी ऐसा ही कुछ सच सामने आएगा।
मेट्रो की आर्थिक स्थिति का पता लगाना चाहती है दिल्ली सरकार
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार मेट्रो रेल की आर्थिक स्थिति का पता लगाना चाहती है। क्योंकि मेट्रो रेल लाभ कमाने वाली कंपनी नहीं है। यह जनता को सस्ता और सुलभ परिवहन की सुविधा देने का साधन है।
इस कारण मेट्रो रेल को सस्ता और सुलभ बनाने की जरूरत है, लेकिन मेट्रो रेल ने किराये में बढ़ोतरी करके लोगों को अन्य साधन उपयोग करने के लिए मजबूर कर दिया है। दूसरी ओर उन्होंने कहा कि किराया बढ़ने के बाद मेट्रो रेल ने यात्रियों की संख्या बताने के लिए तैयार नहीं हो रही है, जबकि डीटीसी में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है।