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Delhi NCR News: पति की बढ़ी आय को देखते हुए पत्नी के भरण-पोषण भत्ते में वृद्धि
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पति की बढ़ी आय और जीवन की बढ़ती लागत को आधार बनाते हुए एक वरिष्ठ नागरिक पत्नी के भरण-पोषण भत्ते में वृद्धि का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अगुवाई वाली पीठ ने पति द्वारा दिए जा रहे गुजारा भत्ता 10 हजार से बढ़ाकर 14 हजार प्रति माह करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उस याचिका पर आया है, जिसमें पत्नी ने पारिवारिक अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी भत्ते में वृद्धि की मांग को खारिज कर दिया गया था।
जानकारी के अनुसार दंपती की शादी 1990 में हुई थी, लेकिन 1992 से पत्नी अलग रह रही थी, जिसका कारण उसने दहेज मांग और शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न बताया। 2011 में तलाक की याचिका खारिज होने के बाद दोनों विवाहित ही रहे। 2012 में पारिवारिक अदालत ने पति को पत्नी को 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। हालांकि, 2018 में पत्नी ने भत्ते को 30,000 करने की मांग की, जिसमें उसने चिकित्सा खर्च और पति की बढ़ी हुई आय (सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद) का हवाला दिया। कोर्ट ने पाया कि पति की सेवानिवृत्ति के बाद भी उसकी पेंशन 28,705 से बढ़कर 40,068 हो गई है, जो भत्ते में वृद्धि का आधार बनता है। न्यायालय ने कहा, पति की आय में वृद्धि और जीवन लागत में बढ़ोतरी, भरण-पोषण राशि बढ़ाने के लिए स्पष्ट परिस्थितियों में बदलाव को दर्शाती है। कोर्ट ने यह भी माना कि पति अब वरिष्ठ नागरिक हैं और उनकी सीमित पेंशन पर निर्भरता है, इसलिए संतुलन बनाते हुए मामूली वृद्धि उचित होगी।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पति की बढ़ी आय और जीवन की बढ़ती लागत को आधार बनाते हुए एक वरिष्ठ नागरिक पत्नी के भरण-पोषण भत्ते में वृद्धि का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अगुवाई वाली पीठ ने पति द्वारा दिए जा रहे गुजारा भत्ता 10 हजार से बढ़ाकर 14 हजार प्रति माह करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उस याचिका पर आया है, जिसमें पत्नी ने पारिवारिक अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी भत्ते में वृद्धि की मांग को खारिज कर दिया गया था।
जानकारी के अनुसार दंपती की शादी 1990 में हुई थी, लेकिन 1992 से पत्नी अलग रह रही थी, जिसका कारण उसने दहेज मांग और शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न बताया। 2011 में तलाक की याचिका खारिज होने के बाद दोनों विवाहित ही रहे। 2012 में पारिवारिक अदालत ने पति को पत्नी को 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। हालांकि, 2018 में पत्नी ने भत्ते को 30,000 करने की मांग की, जिसमें उसने चिकित्सा खर्च और पति की बढ़ी हुई आय (सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद) का हवाला दिया। कोर्ट ने पाया कि पति की सेवानिवृत्ति के बाद भी उसकी पेंशन 28,705 से बढ़कर 40,068 हो गई है, जो भत्ते में वृद्धि का आधार बनता है। न्यायालय ने कहा, पति की आय में वृद्धि और जीवन लागत में बढ़ोतरी, भरण-पोषण राशि बढ़ाने के लिए स्पष्ट परिस्थितियों में बदलाव को दर्शाती है। कोर्ट ने यह भी माना कि पति अब वरिष्ठ नागरिक हैं और उनकी सीमित पेंशन पर निर्भरता है, इसलिए संतुलन बनाते हुए मामूली वृद्धि उचित होगी।
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