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कौन सी मजबूरी थी कि स्कूलों की जमीन आवंटित कर दी BJP को

Tue, 03 Nov 2015 10:41 PM IST
Updated Tue, 03 Nov 2015 10:41 PM IST
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in What restraints, schools land gave to the BJP

दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्कूल के लिए चिह्नित जमीन प्रदेश भाजपा को भूमि उपयोग बदलकर (लैंड यूज चेंज) आवंटित किए जाने पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नाराजगी जताई है।

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उपराज्यपाल नजीब जंग को लिखे गए पत्र में उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि एक शिक्षाविद होने के बावजूद एक स्कूल की जमीन भाजपा कार्यालय के लिए आवंटित कर दिया।

भूमि उपयोग हमेशा जनहित कार्य के लिए बदला जाता है। ऐसी क्या मजबूरी थी कि आप यह फैसला लेने को बाध्य हुए? हालांकि इस मामले में राजनिवास से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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अगली पीढ़ी के भविष्य के हिस्से की जमीन वापस कर दीजिए

in What restraints, schools land gave to the BJP

सिसोदिया ने पत्र में लिखा है कि एक तरफ शिक्षा विभाग के ढेरों प्रस्ताव स्कूल की जमीन आवंटन के लिए दो-ढाई साल से लंबित हैं तो दूसरी तरफ कुछ ही महीने में भाजपा को जमीन आवंटित कर दी।

लाल कुआं तेहखंड गांव की दो एकड़ जमीन स्कूल के लिए आवंटित करने का आवेदन ढाई साल से लंबित है। उपमुख्यमंत्री ने लिखा है, मैं हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि अगली पीढ़ी के भविष्य के हिस्से की जमीन वापस कर दीजिए।

पार्टी कार्यालय खुलना कोई अपराध नहीं है। कार्यालय खोलने का पार्टी को अधिकार है। आप जमीन के मालिक हैं, पार्टियां जमीन मांगेगी लेकिन आपको विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।

इसमें कौन सा जनता हित नजर आया?

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एक शॉपिंग मॉल, अपार्टमेंट कम बनेगा तो चलेगा। आपने स्कूल ही कम कर दिया। भाजपा को जमीन देना ही चाहते थे तो मंत्री या अफसर की कोठी दे दीजिए। पार्टी दफ्तर खुलेगा तो चंद लोगों को अच्छा लगेगा, स्कूल खुलेगा तो पूरी दिल्ली को फायदा होगा।


सिसोदिया ने कहा कि जिस पार्टी को जनता ने मात्र तीन सीट देकर विधानसभा भेजा, उस पार्टी को एलजी ने स्कूल की प्रस्तावित जमीन आवंटित कर दी। इसमें कौन सा जनता हित नजर आया?

कौन सी मजबूरी थी कि ये फैसला लेने को बाध्य हुए? संविधान ने आपको जमीन आवंटन का अधिकार इसलिए नहीं दिया कि बच्चों के भविष्य के लिए आरक्षित जमीन, केंद्र की सत्ताधारी पार्टी की राज्य इकाई को सौंप दें।

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