दिल्ली: प्रदूषण से काली पड़ी यमुना में छठ मना रहे पूर्वांचली, आम आदमी पार्टी और भाजपा में टकराव
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा छठ के मुद्दे पर सियासत कर रही है, जबकि आज तक उसके नेता कभी छठ घाट तक नहीं गए। आप नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा स्वयं पूर्वांचलियों का विरोध करते रहे हैं, लेकिन आज छठ के नाम पर राजनीति कर रहे हैं...
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दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर है। लोग यहां सांस लेने में भी परेशानी महसूस कर रहे हैं और आंखों में जलन महसूस हो रही है। इस वायु प्रदूषण के बीच दिल्ली की यमुना भी प्रदूषण से बेहद काली पड़ गई है। प्रदूषित यमुना में पूर्वांचलवासियों ने आज नहाय-खाय के साथ छठ महाव्रत की शुरुआत की। इस पर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में राजनीति भी गंभीर हो गई है। भाजपा ने दिल्ली सरकार पर यमुना के प्रदूषण पर कोई ठोस कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है, तो आम आदमी पार्टी ने हरियाणा पर समय से यमुना में पानी न छोड़ने का आरोप लगाया है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यमुना में हरियाणा की ओर से कम पानी छोड़ा जा रहा था, जिसके कारण यमुना में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यहां तक कि बढ़े प्रदूषण के कारण दिल्ली के जल संयंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ काम भी नहीं कर पा रहे हैं। यदि हरियाणा सरकार यमुना में समय से पानी छोड़ती तो प्रदूषण का स्तर इतना न बढ़ता।
उन्होंने भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा छठ के मुद्दे पर सियासत कर रही है, जबकि आज तक उसके नेता कभी छठ घाट तक नहीं गए। आप नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा स्वयं पूर्वांचलियों का विरोध करते रहे हैं, लेकिन आज छठ के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। पर्यावरण मंत्री ने सभी संबंधित विभागों की बैठक कर जल्द ही वायु और यमुना स्वच्छता पर ठोस कदम उठाने की बात कही है।
झूठ बोलने का आरोप लगाया
वहीं, भाजपा नेता मनोज तिवारी ने यमुना को स्वच्छ रखने के नाम पर अरविंद केजरीवाल सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने 2013 में ही यमुना को साल भर के अंदर लंदन की टेम्स नदी के जैसा साफ-स्वच्छ करने का वादा किया था। लेकिन आठ-नौ साल बीत जाने के बाद भी दिल्ली सरकार ने यमुना स्वच्छता पर कोई कार्रवाई नहीं की है। दिल्ली के नालों को यमुना में गिरने से रोकने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।
दोनों सरकारों के एजेंसियों की जिम्मेदारी
दरअसल, सच्चाई यह है कि यमुना को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी केंद्र और दिल्ली सरकार की विभिन्न एजेंसियों के ऊपर है। केंद्र सरकार के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल मंत्रालय और नमामि गंगे योजना के अंतर्गत यमुना को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी आती है। इसी प्रकार दिल्ली सरकार के दिल्ली जल बोर्ड, यमुना बाढ़ एवं नियंत्रण विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियत्रण बोर्ड और कई अन्य विभागों की है। लेकिन एक ठोस कार्य योजना के अभाव में यमुना की सफाई नहीं हो पा रही है।