प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कायर व मनोरोगी कहने के मामले में याचिका खारिज
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अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कायर व मनोरोगी कहने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो शब्दों का प्रयोग किया वह हताशा व निराशा के चलते कहे है, इस आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
तीस हजारी अदालत के मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा ने याचिका खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य की शांति भंग करने, घृणा फैलाने या सरकार की संप्रभुता की अवमानना करने जैसा कुछ नहीं कहा है।
मामले में तथ्यों को देखकर यह साफ पता चलता है कि सीबीआई रेड के बाद मुख्यमंत्री ने जो शब्दों का प्रयोग किया वह हताशा व निराशा के चलते कहे।
'ऐसे तो लग जाएगी शिकायतों की बाढ़'
अदालत ने कहा कि मानहानि का मतलब है किसी के निजी जीवन, व्यक्तित्व के बारे में कुछ कहना है। अगर इस याचिका को स्वीकार किया गया तो नेताओं के समर्थक, दोस्त परिजन सब शिकायत लेकर आ जाऐंगे और इससे शिकायतों की बाढ़ लग जाएगी।
अदालत ने कहा कि इस याचिका में शिकायतकर्ता का विशेष रूप से कोई कानूनी नुकसान नहीं हुआ। केवल भावनाएं आहत होने के आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता। ऐसे में याचिका खारिज की जाती है।
गौरतलब है कि सीबीआई ने 15 दिसंबर 2015 को दिल्ली सचिवालय स्थित प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय में छापेमारी की थी। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी का आरोप है कि इस कार्रवाई के बाद केजरीवाल ने ट्विटर हैंडल पर प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी कीं थी।