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भारत के एक जिले में आज भी दलितों का किया जा रहा अंग्रेजों की तरह शोषण

Thu, 15 Sep 2016 05:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नूंह (गुड़गांव)
ब्यूरो/अमर उजाला, नूंह (गुड़गांव) Updated Thu, 15 Sep 2016 05:56 PM IST
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in mewat dalits are still harassed as in british regime
dalit village - फोटो : अमर उजाला

मेवात में लगातार दलितों पर बढ़ रहे अत्याचारों का जायजा लेने व दलितों की पीड़ा सुनने के लिए बुधवार को अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने मेवात का दौरा किया।

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सुबह करीब 10 बजे नूंह जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस पहुंचे और वहां पर उपायुक्त मनीराम शर्मा व पुलिस कप्तान कुलदीप यादव से स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन व दल-बल के साथ नीमखेड़ा, पुन्हाना, नवलगढ़ बिछौर गांवों में जाकर पीड़ितों की बात सुनी।
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सबसे पहले वे पुन्हाना खंड के गांव नीमखेड़ा पहुंचे। नीमखेड़ा में आरोपी सरपंच पक्ष की महिलाओं ने उनका रास्ता रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे वहां से निकलकर सीधे दलित पीड़ित परिवार के पास पहुंचे।
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इस दौरान दलितों की व्यथा सुनकर वे खुद भावुक हुए और कहा कि इन लोगों के लिए आजादी के कोई मायने नहीं हैं। ये लगातार शोषण की चक्की में पिस रहे हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए पुलिस को चाहिए कि वह अपनी कार्रवाई में तेजी लाए और पीड़ितों को न्याय दिलाए।

चुनाव में वोट ने देने पर दल‌‌ित की बेटी को उठा ले गए दबंग

in mewat dalits are still harassed as in british regime
dalit village - फोटो : अमर उजाला

आरोप हैं कि नीमखेड़ा में रह रहे दलित परिवार की एक लड़की को चुनाव में वोट न देने पर सरपंच व उसके पक्ष के दबंग लोग उठा कर ले गए थे। इस पर दलित परिवार ने शिकायत की तो सरपंच ने उनका पानी व बिजली काट दी और उन्हें लगातार डरा-धमकाते रहे।

दलित परिवार ने सरपंच व दबंग लोगों के अत्याचारों से तंग आकर गांव से पलायन भी कर दिया। उन्होंने एससी-एसटी आयोग से शिकायत की। जिस पर बुधवार को आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह नीमखेड़ा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार की बात सुनने के बाद पुलिस विभाग से नाराजगी जताते हुए तुरंत मामले में कर्रवाई निर्देश दिए।

इस दौरान उन्होंने कहा कि 1947 में देश आजाद हो चुका है, लेकिन आज मेवात को देखकर नहीं लगता की यहां पर दलित लोग आजादी से जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही के चलते आज दलित गांव से पलायन करने को मजबूर हैं। इस मुद्दे पर आयोग चुप नहीं बैठेगा।

पुन्हाना पीड़ितों का बांटा दुख-दर्द

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dalit village - फोटो : अमर उजाला

नीमखेड़ा के बाद आयोग के सदस्य प्रशासन को साथ लेकर पुन्हाना पहुंचे। जहां पर उन्हाेंने पीड़ित परिवार के घर जाकर उनका दुख-दर्द जाना। यहां पीड़ित परिवार की एक लड़की को पुन्हाना के ही कुछ लोग 1 सितंबर को हथियारों के बल पर दिनदहाडे़ घर से उठाकर ले गए थे।

 

मामले में 15 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा लड़की व आरोपियों को बरामद नहीं किया गया। पीड़ितों ने बताया कि कार्रवाई के नाम पर उन्हें गुमराह किया गया। जिस पर ईश्वर सिंह ने हर संभव मदद को भरोसा जताते हुए कहा कि आयोग पूरी तरह से उनके साथ है।
 

नीमखेड़ा मामले में ईश्वर सिंह ने उपायुक्त मनीराम शर्मा को पीड़ित व आरोपी पक्ष की बात सुनकर मामले की जांच करने तथा पुलिस कप्तान को दलित उत्पीड़न से जुडे़ सभी मामलों में बृहस्पतिवार तक जांच रिपोर्ट उन्हें सौंपने के निर्देश दिए।

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