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इस अस्पताल की लापरवाही से गई दो नवजातों की जान, डॉक्टरों ने बताया बच्चों को प्रीमेच्योर

Wed, 13 Dec 2017 10:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Wed, 13 Dec 2017 10:48 AM IST
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in jila mahila hospital two newly born babies was dead
जिला महिला अस्पताल का आपातकालीन लेकर रूम - फोटो : अमर उजाला

स्टाफ की लापरवाही के कारण मंगलवार सुबह जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती दो नवजातों की मौत हो गई। इससे भड़के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।

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बच्चों की मौत का कारण बिजली आपूर्ति ठप होने के बाद जेनरेटर नहीं चलाया जाना है। एसएनसीयू में स्टाफ की लापरवाही के कारण रातभर बिजली सप्लाई ठप रही। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में दो नवजातों को भर्ती किया गया था।
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बताया जा रहा है कि दोनों नवजातों का वजन काफी कम था। इनमें से एक का वजन 800 ग्राम तो दूसरे का वजन 1200 ग्राम था। चिकित्सकों के मुताबिक दोनों ही नवजात प्री मेच्योर और संक्रमित थे। इसके कारण दोनों के बचने की संभावना न के बराबर थी।

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जानकारी के मुताबिक सोमवार को कमालपुर निवासी जमीला और मोहाना निवासी यासमीन को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद दोनों की डिलीवरी की गई थी। कमजोर होने के चलते दोनों नवजातों को जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था।

 

सोमवार रात करीब 11 बजे जब आंधी व बारिश के कारण बिजली सप्लाई बाधित हुई तो एसएनसीयू में अंधेरा छा गया। शासन के आदेशानुसार एसएनसीयू में निर्बाध बिजली सप्लाई के इंतजाम होने चाहिए।
 

बिजली सप्लाई ठप होने के बाद संविदा पर तैनात रमेश को अस्पताल स्टाफ ने एक-दो बार फोन किया, लेकिन उसका फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद स्टाफ ने इस ओर मुड़कर भी नहीं देखा और सुबह तक दो बच्चों ने दम तोड़ दिया। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।

in jila mahila hospital two newly born babies was dead

मामले में सीएमओ ने संविदा बिजली कर्मचारी रमेश को तत्काल प्रभाव से हटाने और अस्पताल के बिजली कर्मचारी को अटैच करने के आदेश दिए हैं। सीएमओ डॉ. केएन तिवारी ने बताया कि दोनों नवजात मात्र 26 सप्ताह के थे।
 

ऐसे में दोनों के बचने की संभावना बेहद कम थी। फिर भी अस्पताल स्टाफ की लापरवाही की जांच के आदेश सीएमएस को दिए गए हैं। एसएनसीयू में तैनात डॉ. शालिनी ने बताया कि सुबह बच्चों को भर्ती कराया गया था। बच्चों की हालत गंभीर थी। रात में यूनिट में भी बिजली सप्लाई नहीं थी। 

 दोनों बच्चों की हालत बहुत खराब थी। दोनों प्रीमेच्योर थे। बिजली व्यवस्था को सुचारु करवाने के लिए सीएमओ को निर्देशित किया गया है।  किसी भी हालत में अस्पताल की बिजली नहीं कटनी चाहिए। - डॉ. रोशन जैकब, डीएम

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