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हर क्षेत्र में मनवाया लोहा, आसान नहीं थी सफलता की डगर

Tue, 08 Mar 2016 08:48 AM IST
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा
प्रगति मिश्रा/अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 08 Mar 2016 08:48 AM IST
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In every area success was not easy
इन महिलाओं को सलाम - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा

सफलता की डगर आसान नहीं। इसे पाने के लिए कड़ी मेहनत, ईमानदारी और जुनून का होना आवश्यक है। पुलिस, प्रशासन, समाजसेवा और राजनीति समेत विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन मुकाम पाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया।

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अमर उजाला संवाददाता से कुछ महिलाओं ने संघर्ष की बात साझा की। कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हो उनसे हार नहीं माननी चाहिए। एआरटीओ प्रशासन रचना यदुवंशी ने बताया कि 1991 में उनके पिता का निधन हो गया। वह जब इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। इसके बाद उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारी का एहसास हुआ। 1991 से 2003 तक संघर्ष का दौर रहा। उन्हें 2004 में एआरटीओ की नौकरी ज्वाइन की।
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रचना कहती हैं कि जिम्मेदारी चाहे पारिवारिक हो या फिर प्रशासनिक यदि उन्हें ईमानदारी से निभाया जाए तो राह खुद आसान बन जाती है। इसी सोच के साथ वह घर और विभाग की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

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बेसहारा को सहारा देकर मिलती है संतुष्टि

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विमला बाथम और अंजिना राजगोपालन - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा

नोएडा की विधायक विमला बाथम ने बताया कि राजनीति उनके लिए सिर्फ राजनीति नहीं है। यह समाज से जुड़ने और कुछ करने का एक जरिया है। वह हमेशा सामाजिक सरोकार से जुड़ना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने 1986 से सामाजिक संगठनों के लिए कार्य करना शुरू किया। कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह यदि सक्रिय राजनीति से जुडे़ तो अधिक बेहतर सामाजिक कार्य कर सकती हैं।

जब नोएडा बस रहा था तो यहां आकर उद्यमी बनीं। लोगों की समस्याओं को हमेशा दूर करने का प्रयास किया। समाज सेविका अंजिना राजगोपालन साईं कुटीर नाम की संस्था का संचालन करती हैं। अंजना ने बताया कि 10 वर्ष की उम्र में एक बार उन्होंने सड़क पर कुछ अनाथ बच्चों को पिटते देखा।

उस वक्त बहुत बुरा लगा और उनके लए कुछ करने की ख्वाहिश हुई, लेकिन उम्र कम होने से वह कुछ कर न सकी। लेकिन अपनी इच्छा को पूरा करने का मौका 1989 में मिला जब उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए साईं कुटीर की स्थापना की।

कमजोर बच्चों के जीवन में वंदना शर्मा उम्मीद की किरण

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वंदना शर्मा - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा

मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के जीवन में वंदना शर्मा एक उम्मीद की किरण लेकर आई। साइकोलॉजी से पीएचडी और नेशनल स्कूल ऑफ मेनटली हैंडीक्राफ्ट की टॉपर वंदना ने अपना जीवन विशेष बच्चों को समर्पित किया है।

वंदना कहती हैं कि महिलाएं कमजोर नहीं हैं उनमें इच्छाशक्ति और साहस अधिक होता है। इसका इस्तेमाल कर वह कोई भी कार्य मुमकिन बना सकती हैं।

वेव सिटी द्वारा संचालित माता भगवती चड्ढा निकेतन की जिम्मेदारी निभा रहीं वंदना ने बताया कि उन्हें ढेर सारी जगहों से नौकरी के ऑफर मिले लेकिन उनका मन अशक्त बच्चों की देखभाल में ही लगा।

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