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IMS के आंकड़ों से खुलासा : महिलाओं में 100 गुना तक बढ़ा प्रीमेच्योर मेनोपॉज, दिख रही है दूसरी भी परेशानी
Sun, 29 Jun 2025 02:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 29 Jun 2025 02:15 AM IST
सार
विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रीमेच्योर मेनोपॉज में 40 साल की उम्र से पहले ही महिला में अंडाशय से अंडे का उत्पादन बंद हो जाता है। इस कारण मासिक धर्म बंद हो जाते हैं। इसे अर्ली मेनोपॉज भी कहा जाता है।
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- फोटो : Meta AI
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विस्तार
महिलाओं में प्रीमेच्योर मेनोपॉज की समस्या 100 गुना तक बढ़ गई है। इसके साथ ही दूसरी परेशानी भी सामने आने लगी है। यह खुलासा इंडियन मेनोपॉज सोसायटी के आंकड़ों से हुआ है।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रीमेच्योर मेनोपॉज में 40 साल की उम्र से पहले ही महिला में अंडाशय से अंडे का उत्पादन बंद हो जाता है। इस कारण मासिक धर्म बंद हो जाते हैं। इसे अर्ली मेनोपॉज भी कहा जाता है। देश में करीब 10 साल पहले 10 हजार महिलाओं में से किसी एक महिला में यह समस्या मिलती थी, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 100 महिलाओं में से एक में दिख रही है। डॉक्टरों की माने तो सामान्य भारतीय महिलाओं में औसतन 47 साल की उम्र में मेनोपॉज होता है।
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इंडियन मेनोपॉज सोसायटी की प्रधान सचिव डॉ. रागनी अग्रवाल ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण, कॉस्मेटिक के बढ़ते इस्तेमाल, प्रोसेस्ड फूड, नियमित विलासितापूर्ण भोजन, लगातार तनाव सहित दूसरे कारण से प्रीमेच्योर मेनोपॉज की समस्याएं बढ़ी है। इस कारण विकसित होते बच्चों में बदलाव आता है।
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देखा गया है कि इनके कारण बच्चे के मस्तिष्क की ढलनशीलता प्रभावित होती है। उसमें क्या विकसित होना चाहिए वो नहीं हो पाता। इसी कारण महिलाओं में जल्द महावारी आना और जाने की समस्या भी पाई जा रही है। ऐसी महिलाओं में हड्डियों और मांसपेशियों का कमजोर होना, दिल की बीमारी होने की समस्या देखी गई है। ऐसे में हार्मोनल बदलाव के दौरान इन महिलाओं में प्रबंधन की विशेष आवश्यकता होती है।
झिझक खोले तो समस्याएं होंगी दूर
एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के ओर से मेनोपॉज एंड मिड लाइफ मैनेजमेंट विषय पर आयोजित सीएमई में अस्पताल के निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि महिलाओं को झिझक छोड़कर बात करनी चाहिए। यदि महिलाएं इसके लिए पहले से तैयार रहेंगी तो उन्हें मानसिक व दूसरी समस्याएं नहीं होगी। अस्पताल में ऐसी महिलाओं के लिए विशेष क्लीनिक चल रहा है। यहां हर समस्याओं को दूर किया जाता है। जांच के बाद अस्पताल में आगे का इलाज भी दिया जाता है।
35 की उम्र के बाद करनी चाहिए तैयारी
समय के साथ भारत में महिलाओं का जीवन स्तर सुधरा है। उनकी औसत आयु बढ़ी है। ऐसे में उन्हें 20-30 साल मेनोपॉज की अवस्था में रहना पड़ता है। डॉ. वंदना तलवार और डॉ. पूनम नारंग ने कार्यक्रम में कहा कि मेनोपॉज के बाद पूरे शरीर में बदलाव होता है। ऐसे में हमें 35 की उम्र के बाद इसके लिए तैयार होने की जरूरत है। 45 से 48 की उम्र में मेनोपॉज की अवस्था आती है। इसमें विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहीं 60 की उम्र के बाद खुद के शरीर के प्रबंधन के लिए विशेष ध्यान देना चाहिए।
हर अस्पताल में होना चाहिए विशेष क्लीनिक
देश की आधी आबादी एक समय के बाद मेनोपॉज की अवस्था से गुजरती है। इस कारण होने वाले समस्याओं को दूर करने के लिए हर अस्पताल में विशेष मेनोपॉज क्लीनिक होना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले समय में इस समस्या से पीड़ित महिलाओं की समस्याएं बढ़ेगी।