'अनपढ़ आदमी मंत्री बन सकता है तो सरपंच क्यों नहीं?'
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सरकार द्वारा पंचायती निकाय चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू किये जाने के फैसले को मानव अधिकार अभियान संगठन अदालत में चुनौती देगा। यह जानकारी संगठन के अध्यक्ष अधिवक्ता रमजान चौधरी ने दी।
चौधरी ने कहा कि पंचायती चुनावों में आठवीं और दसवीं पास होने का जो नियम बनाया गया है वह सरासर नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है। इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब एक अनपढ़ आदमी विधायक, सांसद और मंत्री बन सकता है तो फिर सरपंच क्यों नहीं। अनपढ़ विधायक और सांसद जब राज्य का कानून बना सकते हैं तो क्या अनपढ़ सरपंच गांव की गलियां नहीं बना सकता।
फैसले को कोर्ट में दी जाएगी चुनौती
उन्होंने कहा कि सरकार के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी, इसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को इस मसले पर दिल्ली में मानव अधिकार कार्यकर्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से राय लेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश और मेवात इलाके में बहुत से ऐसे अनपढ़ लोग हैं जो पढे़-लिखे लोगों से भी ज्यादा काम करते हैं। सरकार को यह नियम लागू करने से पहले जानकारी लेनी चाहिए थी कि मेवात जैसे पिछडे़ इलाके में महिला और पुरुषों की शिक्षा दर कितनी है।