खनन माफिया बेलगाम, धड़ल्ले से जारी है काला कारोबार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस व प्रशासन अवैध खनन रोक पाने में पूरी तरह से नाकाम है। अब पुलिस महानिदेशक के साथ हुई बैठक के बाद इस पर अंकुश लगने की उम्मीद जगी है।
मेवात जिले के गांव साईमीर बास, रवा, शाहचौखा, खानपुरघाटी, झिमरावट, रीठट, बाजीदपुर आदी के पहाड़ों में धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है।
इसके अलावा, तावडू खंड के चूहूड़पुर और नगीना के गांव सकरपुर और राजस्थान के अलवर जिले के गांव बालौज में अवैध खनन हो रहा है।
हर वक्त हादसों का खौफ
इस पहाड़ से आने वाले पत्थर पास में ही चल रही क्रेशर मशीनों पर ट्रैक्टरों के माध्यम से डाले जाते हैं। यहां पर कई क्रेशर मशीनें लगी हुई हैं जो राजस्थान सीमा में पड़ती हैं जबकि हरियाणा सीमा में पड़ने वाली तीन क्रेशर मशीनों को मेवात प्रशासन पहले ही हटा चुका है।
पहाड़ में दिनभर ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें चलती हैं, इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। उल्लेखनीय है कि फखरपुर खोरी इलाका राजस्थान में पड़ता है। इसे मेवात पुलिस रोकने का प्रयास नहीं करती, वहीं राजस्थान पुलिस यहां केवल खानापूर्ति करने के लिए आती है।
आरोप है कि कई अधिकारी क्रेशर मालिकों से मिलकर अवैध खनन करवा रहे हैं। मेवात की स्थानीय सड़कों पर अवैध खनन से भरे ट्रैक्टर दिन भर देखे जा सकते हैं। लोगों का यह भी आरोप है कि अवैध खनन से भरे ट्रैक्टर इतनी तेज रफ्तार से चलते हैं कि हादसे का अंदेशा बना रहता है।
पुलिस के साथ होती है मारपीट
अगर कोई पुलिसकर्मी खनन माफियाओं से सौदेबाजी नहीं करता तो उनको अंजाम भुगतना पड़ता है। आलम यह होता है कि पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अक्सर पिटते हैं। वर्ष 2005 से पुलिस 87 बार अवैध खनन माफिया से पीट चुकी है। इसमें 112 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
अवैध खनन से जुड़े वाहनों को अपने स्थान पर पहुंचने की जल्दी होती है। ऐसे में वे तेज गति से चलते हैं। इससे उनकी चपेट में आकर जान गंवाने वालों की संख्या कम नहीं है।
2005 में 254, 2006 में 286, 2007 में 206, 2008 में 190, 2009 में 272, 2010 में 307, 2011 में 246, 2012 में 162 व 2013 में 120 वाहन दुर्घटनाएं हुई हैं।
लापरवाही से अवैध खनन को बल
गुड़गांव व मेवात के लिए माइनिंग अभियंता की तैनाती की गई है। इन माफियाओं से निपटने के लिए तीन इंस्पेक्टर हैं। विभाग के लोग कहने के लिए रोजाना गश्त पर जाते हैं। जानकारों की मानें तो वह केवल खानापूर्ति करते हैं।
एक तरफ उनका संसाधनों को लेकर रोना व दूसरी ओर इतनी बड़ी समस्या से निपटने में संख्या बल कम होना बताया जा रहा है। माइनिंग इंस्पेक्टर सुरेश सारवान का कहना है कि विभाग की ओर से तय की जाने वाली रणनीति पर काम किया जाता है।
मेवात के पुलिस अधीक्षक अनिल धवन ने कहा कि चोरी छिपे मेवात में अवैध खनन होता है। उसे रोकने के लिये प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस बल मिलने के बाद उसे पूरी तरह से बंद किया जाएगा। जल्द ही प्रशासन के साथ बैठक कर उसे रोकने के लिए बैठक की जाएगी।
चर्चित घटनाएं
: वर्ष 2011 में डपर चालकों से अवैध पैसे वसूलने पर तीन पुलिस कर्मियों पर मामला दर्ज हुआ।
: 2012 में राजस्थान के चूहूड़पुर में दो साल पहले अवैध खनन की वजह सें पांच मजदूरों की मौत हो चुकी है।
: राजस्थान से अवैध खनन के पत्थर मेवात के रास्ते दिल्ली जाते हैं।
मेवात पुलिस में दर्ज मामलों का ब्योरा
वर्ष 2006 में 151, 2007 में 97, 2008 में 120, 2009 में 161, 2010 में 157, 2011 में 96, 2012 में 92, 2013 में 78