आईआईटी के इंजीनियर इलाज में एम्स का बटाएंगे हाथ, मेक इन इंडिया को बढ़ावा देंगे संस्थान
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मेडिकल उपकरण को लेकर विशेषज्ञता हासिल कर चुका आईआईटी खड़कपुर अब दिल्ली एम्स में मरीजों के इलाज में हाथ बटाएगा। देश के इन दो शीर्ष संस्थानों के बीच इसके लिए एमओयू पर करार हो गए हैं। दरअसल, आईआईटी खड़गपुर के इंजीनियर एम्स के लिए मेडिकल उपकरण तैयार करेंगें। वहीं, एम्स के डॉक्टर इंजीनियरों को शोध करने में मदद करेंगे। ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिल सके।
बता दें कि आईआईटी खड़गपुर ने इसी वर्ष बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग में एमटेक का दो वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू किया है। इसके अलावा मोलीक्यूलर मेडिकल माइक्रोबॉयोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन और मेडिकल फिजिक्स को लेकर भी कोर्स शुरू किए गए हैं। एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया और आईआईटी निदेशक डॉ. प्रथा प्रतिम चक्रवर्ती ने एक दूसरे को सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
जानकारी के अनुसार आईआईटी खड़गपुर को मेडिकल उपकरण, जांच डिवाइस और मरीजों की तकनीकी स्तर पर जानकारी के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने में विशेषज्ञता हासिल है। दोनों ही संस्थान शिक्षा और तकनीकी स्तर पर एक-दूसरे की मदद करेंगे। एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया की मानें तो आने वाला वक्त उच्च तकनीकी युक्त चिकित्सा का होगा। इसलिए स्वास्थ्य के साथ तकनीकी जरूरी है। मेडिकल डाटा सहित तमाम जानकारी कागजों पर लेने के बाद यह करार हुआ है।
एम्स की मदद से आईआईटी में रिसर्च अस्पताल
जल्द ही एम्स की मदद से आईआईटी खड़गपुर अपने परिसर में रिसर्च अस्पताल खोलने जा रहा है। ऐसा पहली बार होगा जब किसी आईआईटी में रिसर्च अस्पताल होगा। आईआईटी खड़गपुर ने एम्स के साथ मिलकर डॉ. बीसी राय इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च की स्थापना का फैसला लिया है।
आर्थो, कार्डियो के अलावा न्यूरो सांइस को बढ़ावा देने वाले इस अस्पताल को इस साल दिसंबर तक शुरू करने का लक्ष्य है। करीब 400 बिस्तर वाले इस अस्पताल को 400 करोड़ की लागत से करीब 42 एकड़ में बनाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो 2021 तक आईआईटी खड़गपुर अपने इस अस्पताल में एमबीबीएस की पढ़ाई भी शुरू करेगा।
एम्स के लिए इंजीनियर करेंगे शोध, डॉक्टर देंगे साथ
एम्स की तरह आईआईटी भी दिल्ली स्थित देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल के लिए शोध करेगा। इसमें एम्स के डॉक्टर भी आईआईटी इंजीनियरों का साथ देंगे। नई रिसर्च के जरिए तैयार मशीनों को एम्स अपने यहां स्थापित कर मरीजों का उपचार करेगा। इसके अलावा इंटर्नशिप, कोर्सेज पर भी काम होगा। सरकार, विदेशी संस्थाओं और राष्ट्रीय कोष संस्थाओं से मदद भी ली जाएगी। इससे न सिर्फ स्वदेशी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मेडिकल उपकरण में विदेशों का अधिकार भी थोड़ा कम होगा।