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IIT दिल्ली की रिसर्च: सड़कों पर किए छोटे-छोटे सुधार, पीएम 2.5 में आई कमी, वायु प्रदूषण पर आई ये खास रिपोर्ट

Thu, 03 Oct 2024 11:09 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, आशीष सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आशीष सिंह Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 03 Oct 2024 11:09 PM IST
सार

राजधानी दिल्ली में सड़क-फुटपाथ सुंदर हों और  गंदगी भी हो दूर तो प्रदूषण के खिलाफ युद्ध जीत सकते हैं। आईआईटी दिल्ली ने राजधानी में शोध किया है। सड़कों पर किए छोटे-छोटे सुधार, पीएम2.5 की मात्रा में 27% तक की कमी है।

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IIT Delhi research report said that small steps reduced the amount of pollutants
वायु प्रदूषण - फोटो : Freepik

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों और फुटपाथ को ठीक रखा जाए। साथ ही, सड़कों पर कूड़े का अंबार न रहे तो प्रदूषण के खिलाफ युद्ध जीतने में सहूलियत होगी। आईआईटी दिल्ली की ओर से किए गए शोध की रिपोर्ट बताती है कि इस तरह के छोटे-छोटे कदमों से प्रदूषकों की मात्रा में कमी लाई जा सकती है। इससे सबसे ज्यादा गिरावट बेहद नुकसानदेह धूल के महीन कणों पीएम2.5 में दिखती है।
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दरअसल, आईआईटी दिल्ली ने राजधानी के तीन क्लस्टरों में प्रदूषकों को उसके स्रोतों पर खत्म करने के लिए एक अध्ययन किया। इसकी नोडल एजेंसी एमसीडी थी। वहीं, 11 अन्य एजेंसियां भी इसमें सहयोगी रहीं। जहांगीरपुरी, रोहिणी व करोल बाग में किए गए अध्ययन के दौरान टूटी सड़कों, जर्जर फुटपाथ व गंदगी का अध्ययन कर इसे ठीक किया गया। इसमें 35 सेंसर लगाए गए थे। पूरा अध्ययन जुलाई 2023 से मार्च 2024 के बीच हुआ। इसमें शोध शुरू करने से पहले, दौरान और पूरा होने के बाद पीएम2.5 के आंकड़े जुटाए गए।
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बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में इन छोटे बदलावों के नतीजे हैरान करने वाले दिखे। सड़क व फुटपाथ बेहतर होने व कचरे के प्रबंधन से जहांगीरपुरी में पीएम2.5 में 27 फीसदी की कमी आई। वहीं, रोहिणी में 15.7 प्रतिशत और करोलबाग में 15.3 प्रतिशत तक की कमी आई।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से स्थानीय स्रोतों से धूल के महीन कण पीएम2.5 पैदा हो रहे हैं, उसमें अगर कारगर तरीके से ठोस कदम उठाए गए तो प्रदूषण के खिलाफ चल रही जंग जीतने में मदद मिलेगी। आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज के प्रो. साग्निक डे ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में जगह-जगह टूटी-फूटी सड़कें, निर्माण कचरे की अवैध तरीके से डंपिंग, कचरे को जलाने की वजह से प्रदूषण काफी बढ़ा है। अभी तक यह सिर्फ चर्चाओं में रहा कि सफाई के जरिये प्रदूषण को कम किया जा सकता है। इसे वैज्ञानिक तौर पर साबित करने के लिए हमने यह अध्ययन किया।

एनसीआर पर भी केंद्रित
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के दिशा-निर्देश पर चल रहे डिस्पर्स्ड सोर्सेज प्रोग्राम (डीएसपी) के तहत अध्ययन किया गया। दिल्ली के अलावा इसमें गुरूग्राम, फरीदाबाद, नोएडा व गाजियाबाद के भी कुछ स्थान शामिल हैं। एनसीआर के शहरों के नतीजे नहीं आए हैं। प्रोग्राम में टूटी-फूटी सड़कों, क्षतिग्रस्त फुटपाथों, बड़े गड्ढों और कई कम अवधि के मसलों जैसे निर्माण और अपशिष्ट मलबा व सड़कों के किनारे जमा होने वाले कचरे से संबंधित मसलों से निपटना होता है।

आठ माह में 2.3 लाख शिकातें, तब जाकर साफ हुई हवा
शोध से पहले एप बनाया गया। इसमें चयनित स्थानों से आठ माह तक 2.3 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज्यादा दिल्ली में 2.06 लाख, नोएडा में 16,361, गाजियाबाद में 11,351, गुरुग्राम में 2,031 और फरीदाबाद में 1,841 शिकायतें शामिल थीं। स्थानीय निकायों की मदद से इनका समाधान किया गया।

शोधकर्ताओं की राय
शोध इस बात का सबूत देता है कि प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण करने से वायु गुणवत्ता में सार्थक और स्थायी रूप से सुधार संभव है। इस लिहाज से व्यापक रूप से नीतिगत बदलावों और वायु गुणवत्ता के प्रबंधन के लिए देशभर के शहरों की ओर से इस प्रोग्राम को अपनाया जाना चाहिए। - डॉ. सोफिया राव, शोधार्थी, आईआईटी दिल्ली

दिल्ली के प्रदूषण में पीएम2.5 का बढ़ता स्तर चिंताजनक है। इसके लिए एमसीडी ने बतौर नोडल एजेंसी सहयोग दिया। आने वाले दिनों में दिल्ली के वातावरण के लिए अधिक व्यापक व स्थायी प्रभाव पैदा कर सकेंगे। - तारिक थॉमस, अतिरिक्त आयुक्त, एमसीडी

यह अत्याधुनिक कार्यक्रम है। इसके जरिये क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण से निपटा जा सकता है। इसे देश के अन्य शहरों में भी नेशनल क्लीन एयर एक्शन प्लान (एनसीएपी) के तहत अपनाया जा सकता है। - मोहित बोइत्रा, सीईओ, शोध में शामिल निजी संस्था ए-पीएजी

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