IIT में अगले साल से पढ़ाई हो सकती है महंगी, सालाना फीस में होगी चार लाख की बढ़ोतरी
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आईआईटी में अगले साल से बीटेक फीस दो लाख से बढ़कर छह लाख हो जाएगी। सरकार अब आईआईटी को चार से पांच लाख रुपये सालाना फीस की सब्सिडी का पैसा नहीं देगी। सब्सिडी का पैसा अब छात्रों को स्कॉलरशिप के रूप में उनके बैंक अकाउंट में मिल जाया करेगा।
दिल्ली में आईआईटी की शुक्रवार को होने वाली काउंसिल बैठक में यह प्रस्ताव आईआईटी को वित्तीय स्वायत्तता के तहत आएगा। इसके तहत अब फीस की सब्सिडी का पैसा आईआईटी को नहीं मिलेगा।
आईआईटी में अभी सामान्य वर्ग के छात्र की फीस दो लाख रुपये सालाना हैं। हालांकि आईआईटी को प्रति छात्र पांच से छह लाख रुपये सालाना से अधिक का खर्चा आता है। फीस के अलावा राशि आईआईटी को सरकार फंड के रूप में एकमुश्त हर साल देती है।
अब पारदर्शिता लाने के मकसद से सरकार फीस की सब्सिडी का पैसा सीधे छात्रों के अकाउंट में स्कॉलरशिप के रूप में देगी। हर वर्ष एक दिसंबर को कितने छात्रों को कितनी स्कॉलरशिप के तहत कितना पैसा उनके अकाउंट में ट्रांसफर किया गया, उसकी जानकारी भी सार्वजनिक कर दी जाएगी। फिलहाल अभी सरकार फीस में कोई बदलाव तो नहीं कर रही है, लेकिन आने वाले सालों में बदलाव संभव है।
इस प्रस्ताव को लाने पर सरकार का मानना है कि छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं बेशक फीस सब्सिडी से जुड़ी हों, उनको सीधी मिलनी चाहिए। इसमें आईआईटी का कोई दखल नहीं रहेगा। आईआईटी को सामान्य वर्ग के छात्र पूरी फीस देंगे पर अभिभावकों पर अधिक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
अभी तक आईआईटी फीस सब्सिडी के कुल फंड में से कितना पैसा फीस पर खर्च किया, उसको लेकर कोई नियम नहीं था। आईआईटी को यह प्रस्ताव पास होने पर अपना खर्चा टयूशन फीस, इंडस्ट्री, रिसर्च से पूरा करना होगा। सरकार ने प्रस्ताव के माध्यम से हालांकि स्पष्ट किया है कि वह किसी भी आईआईटी को मिलने वाले फंड में कटौती नहीं करेगी।
छात्रों को लाभ की दलील:
सूत्रों का कहना है कि इस बदलाव से आईआईटी को स्वायत्तता तो मिलेगी पर फीस की सब्सिडी के रूप में मिलने वाले फंड से अपने खर्चे निकालने का रास्ता बंद हो गया। सरकार आईआईटी के फंड में कोई बढ़ोतरी नहीं करेगी। सूत्र कहते हैं कि आईआईटी में पढ़ाई करने वाले छात्रों को कोई आर्थिक बोझ नहीं पढने वाला। क्योंकि अतिरिक्त फीस का पैसा स्कॉलरशिप के माध्यम से उन्हें मिल जाएगा। इस बदलाव में आरक्षित वर्ग और पांच लाख रुपये की आमदनी वाले परिवारों के छात्रों को बाहर रखा जाएगा। क्योंकि उनकी फीस सामान्य वर्ग से बेहद कम होती है।