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IGI Airport: एआई संग नई उड़ान... कोहरे में भी सफर आसान, फॉग-प्रूफ बना एयरपोर्ट; अब धुंध में कम होगी मुसीबत
Thu, 11 Dec 2025 03:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
ज्योति सिंह, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 11 Dec 2025 03:46 AM IST
सार
देश के सबसे व्यस्त हवाईअड्डे दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट ने दावा किया है कि इस बार सर्दियों की घनी धुंध के बावजूद उड़ानों में न्यूनतम रुकावट होगी।
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दिल्ली एयरपोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
दिल्ली एयरपोर्ट अब एआई और कुछ खास तकनीकों की मदद से कोहरे को मात देने के लिए तैयार है। इन तकनीकों की मदद से धुंध के कारण फ्लाइट कैंसल होने की दुविधा से छुटकारा मिलेगा। देश के सबसे व्यस्त हवाईअड्डे दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट ने दावा किया है कि इस बार सर्दियों की घनी धुंध के बावजूद उड़ानों में न्यूनतम रुकावट होगी।
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एयरपोर्ट के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली डायल का कहना है कि अगली पीढ़ी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और रनवे अपग्रेड की मदद से आईजीआई को लगभग फॉग-प्रूफ बना दिया गया है। इसके लिए आइजीआइ में एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर (एपीओसी) बनाया गया है। इसकी मदद से रियल-टाइम मौसम डेटा, हवाई यातायात की स्थिति और ग्राउंड आपरेशंस को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर सेकंडों में ही अपडेट मिलेगा, जिससे तुरंत फैसले लिए जा सकेंगे। यहां तक की इससे रनवे का बेहतरीन इस्तेमाल, गेट आवंटन में तेजी और फ्लाइट सीक्वेंसिंग में सटीकता भी आएगी।
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रियल-टाइम फैसलों के लिए एपीओसी की शुरुआत
एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर (एपीओसी) तैयार किया गया है, जिसमें रियल-टाइम मौसम डेटा, हवाई यातायात की स्थिति, और ग्राउंड ऑपरेशंस को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ दिया गया है। इससे सेकंडों में ऑपरेशनल फैसले लिए जा सकेंगे, रनवे का अधिकतम उपयोग होगा, और गेट आवंटन व फ्लाइट सीक्वेंसिंग पहले से अधिक तेज और सटीक हो जाएगी।
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36 घंटे पहले पता चलेगा कोहरा
दिल्ली एयरपोर्ट ने पुणे स्थित आईआईटीएम के विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (वाईफाईएक्स) मॉडल को अपने सिस्टम से जोड़ा है, जिसकी 85 फीसदी सटीकता बताई गई है। यह मॉडल 36 घंटे पहले घने कोहरे का अलर्ट दे देता है, जिससे एयरलाइंस, एटीसी, और ग्राउंड स्टाफ पहले से तैयारी कर लेते हैं और उड़ान संचालन बाधित नहीं होता।
जीरो विजिबिलिटी में भी लैंडिंग
डायल के अनुसार आईजीआई के तीनों मुख्य रनवे 11L/29R, 11R/29L और 10/28 अब दोनों सिरों से कैट–III इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम से सुसज्जित हैं। द्वारका साइड पर रनवे 10/28 के अपग्रेड के बाद जीरो विजिबिलिटी में भी सुरक्षित लैंडिंग संभव है। वहीं, अब प्रति घंटे 30 लैंडिंग हो सकेंगी। जहां पहले घना कोहरा छंटने के बाद सामान्य संचालन शुरू करने में 6 घंटे लगते थे, लेकिन अब यह समय घटकर सिर्फ 2 घंटे रह जाएगा।
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