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अगर आपने 2018 में वोटर कार्ड बनवाया है तो आपको दिल्ली सरकार नहीं देगी ये सुविधाएं

Wed, 21 Feb 2018 12:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 21 Feb 2018 12:30 PM IST
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If you have built a voter card in 2018 then you may not avail such facilities by Delhi government.
kejriwal

साल 2018 में मतदाता कार्ड बनवाने वालों को मुफ्त चिकित्सीय जांच और सर्जरी की सुविधा से दूर कर दिया गया है।  जबकि सरकार ने कुछ समय पहले ही यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग के पास शिकायतों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। 

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दरअसल, सरकार ने 1 दिसंबर 2017 तक दिल्ली का वोटर कार्ड और आधार कार्ड बनवाने वाले लोगों को अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सीय जांच और सर्जरी की सुविधा दी है। अगर सरकारी अस्पताल में सुविधा मौजूद नहीं है तो मरीज निजी अस्पताल में जाकर ऑपरेशन या एमआरआई व सीटी स्कैन जैसी चिकित्सीय जांच करवा सकता है।
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लेकिन सूत्र बताते हैं कि करीब दो से तीन हजार ऐसे युवा मतदाता सूची में शामिल हो चुके हैं, जिनके वोटर कार्ड और आधार कार्ड 1 दिसंबर 2017 के बाद बनकर तैयार हुए हैं। ऐसे में इन्हें स्वास्थ्य योजना देने की मांग उठ रही है।
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इस बारे में निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं का कहना है कि इस मामले की जानकारी विभाग को भलीभांति है। इस पर विचार चल रहा है। सरकार जल्द ही इस योजना के लिए संशोधन ला सकती है।

हर मरीज का होना चाहिए कार्ड

If you have built a voter card in 2018 then you may not avail such facilities by Delhi government.
health insurance

सरकार का कहना है कि निशुल्क चिकित्सीय जांच और सर्जरी की सुविधा लेने के लिए हर मरीज का वोटर और आधार कार्ड होना जरूरी है। जबकि दिल्ली में कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके मुखिया के पास दिल्ली का पहचान पत्र है, लेकिन बाकी सदस्यों के पास नहीं है। ऐसे में इन परिवारों के आगे भी स्वास्थ्य लाभ लेने की परेशानी खड़ी हुई है। 

आदेश में सरकार ने दी थी जानकारी
दिल्ली स्वास्थ्य सेवा द्वारा जारी इस आदेश में यह भी कहा गया है कि इस सुविधा को लेने के लिए मरीज को  दिल्ली का वोटर आई कार्ड और आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करानी होगी। इसके बाद संबंधित अस्पताल के चिकित्सा निदेशक/अधिक्षक /सह अधिक्षक /सीएमओ ऑथराइज फार्म जारी करेंगे।

इस फॉर्म पर इन अधिकारियों के मुहर का होना भी आवश्यक है, अन्यथा यह मान्य नहीं होगा। वहीं अगर किसी मामले में यह पाया गया कि मरीज को यह सुविधा देने में तय नियमों का पालन नहीं किया गया है तो फॉर्म जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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