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पेड़ अगर वोटर होते तो नहीं काटे जाते : हाईकोर्ट

Mon, 06 Mar 2017 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 06 Mar 2017 10:32 PM IST
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If the trees are not harvested voters: HC
file photo - फोटो : अमर उजाला

पेड़ अगर वोटर होते तो शायद उन्हें नहीं काटा जाता। यह तल्ख टिप्पणी हाईकोर्ट ने राजधानी में पेड़ों की कटाई के बारे में की है। कोर्ट ने कहा राजधानी में कितने पेड़ काटे जाते हैं इसका सीएजी ऑडिट होना चाहिए। 

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जस्टिस बीडी अहमद व जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने अगर पेड़ों को भी मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाए तो शायद उन्हें न काटा जाए। इससे पहले कोर्ट को बताया गया कि स्थानीय निकाय जैसे दिल्ली मेट्रो अपने प्रोजेक्ट व अतिक्रमण करने वाले असोला सेंचुरी जैसे स्थानों पर पेड़ों को काट रहे हैं। 
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कोर्ट ने यह टिप्पणी वायु प्रदूषण से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। राजधानी में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण दिल्ली व आसपास के इलाकों में पेड़ व हरित क्षेत्र में हो रही कमी को माना जा रहा है। 
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कोर्ट का मानना है कि राजधानी में काटे जाने पेड़ व उससे मिलने वाली लकड़ी के प्रयोग के बारे में जानकारी के लिये सीएजी का ऑडिट करवाया जाना चाहिए। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि दिल्ली सरकार ने असोला भाटी सेंचुरी में अतिक्रमण की पहचान के लिए समय सीमा का पालन नहीं किया है। अदालत ने इस मामले में आगे सुनवाई के लिए 9 मार्च की तारीख तय की है।

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