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रीति-रिवाज समलैंगिक विवाह को मान्यता दें तो सभी कानून भी इसे मानेंगे: हाईकोर्ट

Thu, 15 Oct 2020 05:04 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Thu, 15 Oct 2020 05:04 PM IST
सार

  • - समलैंगिक विवाह की दो याचिकाओं पर केंद्र, दिल्ली सरकार को जारी किया नोटिस

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If customs recognize gay marriage, all laws will also accept it: High Court
समलैंगिक दोस्त

विस्तार

समलैंगिक विवाह से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा, अगर रीति-रिवाज समलैंगिक विवाह को मान्यता दे दें तो सभी कानून भी इसे मान लेंगे। फिर चाहे वह विशेष विवाह अधिनियम (एसएमए) हो या विदेश विवाह अधिनियम (एफएमए)। जस्टिस आरएस एंडलॉ और जस्टिस आशा मेनन की पीठ ने कहा, हमारे यहां विवाह को प्रथाओं के आधार पर परिभाषित किया गया है। जिसमें समलैंगिक विवाह मान्य नहीं है। 

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एसएमए या एफएमए में विवाह की परिभाषा तय नहीं है। हर कोई विवाह को प्रथाओं के आधार पर पहचानता है। अगर प्रथाएं समलैंगिक विवाह को मान्यता दें तो कानून भी देगा। पीठ जिन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी उसमें एक में एसएमए के तहत विवाह की अनुमति और दूसरे में एफएमए के तहत शादी पंजीकृत करने का निर्देश मांगा गया था। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और न्यूयॉर्क स्थित वाणिज्य दूतावास को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ इस मामले में 8 जनवरी को सुनवाई करेगी।
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कोर्ट ने कहा, एसएमए कानून इस लिए बनाया गया क्योंकि अंतर धर्म और अंतर जातीय विवाहों के लिए कोई प्रथा नहीं थी। पीठ ने इस दौरान यह संदेह उठाया कि क्या याचिकाकर्ताओं को प्रथाओं के तहत विवाह की परिभाषा को भी चुनौती दी जानी चाहिए। पीठ ने सुझाव दिया कि अगर याचिकाकर्ता ऐसा चाहते हैं और याचिका में बदलाव चाहते हैं तो अभी कर दें, इसमें आगे के लिए इंतजार न करें। 
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कोर्ट ने कहा, कानून की भाषा लिंग आधारित नहीं होती। इसलिए कानून की व्याख्या करते वक्त सभी नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए अर्थ लगाना चाहिए। कोर्ट की टिप्पणी विदेश मंत्रालय की ओर से पेश वकील राजकुमार यादव के जवाब के बाद आई। यादव ने कोर्ट को बताया, 5000 वर्ष के सनातन धर्म के इतिहास में ऐसी स्थिति पहली बार आई है। 


याचिकाकर्ताओं की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा, याचिकाकर्ता किसी प्रथा या धार्मिक कानून के तहत राहत की मांग नहीं कर रहे हैं। वह एसएमए और एफएमए जैसे कानून जो जोड़ों को मिलते हैं उन्हें अपने लिए लागू करने की मांग कर रहे हैं। गुरुस्वामी ने बताया, एसएमए और एफएमए कानून प्रथाओं पर आधारित नहीं हैं।

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