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'मैं नशे में थी..अंर्तवस्त्र गायब थे..नहीं पता रेप हुआ'

Wed, 05 Aug 2015 11:55 PM IST
विजय सिंघल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 05 Aug 2015 11:55 PM IST
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I was drunk..inner wear was missed.. don't know raped or not.

गुड़गांव स्थित एक कंपनी में काम करने वाली युवती ने अपने टीम लीडर पर रेप का आरोप लगाया। उसने कहा कि टीम लीडर की पदोन्नति पार्टी में उसने इतनी ज्यादा शराब पी ली कि उसे होश ही नहीं रहा।

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अगले दिन अंर्तवस्त्र गायब मिले तो उसे रेप की जानकारी हुई। अदालत में वह बयानों से मुकर गई, कहा उसे नहीं पता कि रेप हुआ या नहीं।

आखिर अदालत ने उसके दोस्तों के बयान के आधार पर आरोपी को छेड़छाड़ (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने) के आरोप में चार वर्ष कैद की सजा सुना दी लेकिन रेप के आरोप से बरी कर दिया।

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कमरा बंद कर गलत काम हुआ!

I was drunk..inner wear was missed.. don't know raped or not.

द्वारका अदालत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विरेंद्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि लड़की ने स्वयं माना है कि आरोपी टीम लीडर संजीव कुमार निवासी लखनऊ कैंट ने महावीर एन्क्लेव, पालम कॉलोनी स्थित घर पर 10 मई 2014 को अपनी पदोन्नति की पार्टी दी थी।

इसमें कुल सात लड़के-लड़कियां शामिल हुए। सभी ने जमकर शराब पी ओर उसे होश नहीं रहा। सुबह उसकी दोस्त ने घर छोड़ा, होश में आने पर उसने अपने अंर्तवस्त्र गायब मिले।

दो दिन बाद कार्यालय में जाने पर उसने इस बात की जानकारी दोस्तों को दी तो उन्होंने बताया कि आरोपी संजीव ने कमरा बंद कर उससे गलत काम किया।

होश आया तो आरोपी सामने खड़ा था

I was drunk..inner wear was missed.. don't know raped or not.

गवाही के दौरान पीड़िता ने कहा कि उसे होश नहीं था उसे नहीं पता कि रेप हुआ या नहीं। उसे इतना पता है कि जब कुछ समय के लिए होश आया तो आरोपी उसके सामने खड़ा था।

अदालत ने कहा कि दूसरी तरफ उसके दोस्तों ने कहा कि आरोपी दो बार पीड़िता के कमरे में गया व अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उन्होंने शोर मचाया तो आरोपी ने काफी देर बाद दरवाजा खोला था।

अदालत ने कहा कि ऐसे में यह साबित नहीं हो पाया कि आरोपी ने रेप किया था। वहीं, दोस्तों के बयान से छेड़छाड़ का मामला बनता है। अत: वे आरोपी को चार वर्ष की कैद व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा देते है।

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अगर दोस्त शोर न करते तो..

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अदालत ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने पदोन्नति मिलने पर पार्टी दी थी।

ऐसे में उसकी जिम्मेदारी थी कि वह अपने मेहमान की रक्षा करे। उसे पता था कि पीड़िता ने ज्यादा शराब पी ली और ऐेसे में उसके मान-सम्मान की रक्षा करने की अपेक्षा उसने स्वयं ही अश्लील हमला कर दिया।

यह गंभीर मामला है। उसने पीड़िता के कपड़े उतारे व उसका इरादा वासना पूर्ति का था। यदि समय रहते दोस्त शोर न करते तो पीड़िता के सम्मान की रक्षा करना असंभव था।

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