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धरी रह गई सारी चालाकी: पति ने खुद को बेरोजगार बताकर नहीं दिया पत्नी को गुजारा भत्ता, ITR में निकला करोड़पति

Sat, 22 Nov 2025 05:30 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sat, 22 Nov 2025 05:30 PM IST
सार

आरोपी पति ने मामले में अदालत को गुमराह करते हुए खुद को बेरोजगार बताया था, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में वह करोड़पति निकला। आयकर विवरण की जांच में उसके कई खाते में लगभग एक करोड़ से अधिक की रकम निकली। 

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Husband claims to be unemployed in court refuses to pay alimony to wife turns out to be a millionaire in ITR
वकील ने खोली झूठे पति की पोल - फोटो : AI Image

विस्तार

घरेलू हिंसा के एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पत्नी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पति को हर महीने 80,000 रुपये अंतरिम मेंटेनेंस देने का आदेश दिया है, जिसमें 50,000 रुपये पत्नी के गुजारे के लिए और 30,000 रुपये नाबालिग बच्चे के खर्च के लिए होंगे। अदालत ने यह रकम मामला दायर करने की तारीख से लागू मानी है और तीन महीने के भीतर बकाया राशि चुकाने को कहा है। 

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आरोपी पति ने मामले में अदालत को गुमराह करते हुए खुद को बेरोजगार बताया था, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में वह करोड़पति निकला। आयकर विवरण की जांच में उसके कई खाते में लगभग एक करोड़ से अधिक की रकम निकली। ऐसे में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मोक्ष बैंस ने फैसले में साफ कहा कि इस स्टेज पर मामले के गुण-दोष पर नहीं जाएंगे, लेकिन पति की वित्तीय स्थिति साफ है। उन्होंने डीवी एक्ट की धारा 23 के तहत अंतरिम राहत देते हुए जोर दिया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी है, खासकर जब वह बच्चे की परवरिश अकेले कर रही हो।

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अदालत ने आदेश दिया कि फैसले में पति को हर कैलेंडर महीने की 10 तारीख तक पत्नी के बैंक खाते में रकम जमा करनी होगी। अगर पहले से दिए गए 6,000 रुपये मासिक को एडजस्ट करना हो, तो वह भी कटौती के बाद बाकी राशि चुकानी होगी। बकाया तीन महीने में चुकाना होगा, वरना सख्त कार्रवाई होगी। सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील विवेक शर्मा ने अदालत से कहा कि पति अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए झूठ बोल रहा था। उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ हमारी जीत है, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए मिसाल है, जो आर्थिक शोषण झेल रही हैं। वहीं, पति के वकील का तर्क था कि पत्नी बिना वजह ससुराल छोड़ गई और मामला आपसी सहमति से सुलझ सकता है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2025 को होगी, जहां पत्नी के सबूत पेश होंगे।

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पति ने खुद को बेरोजगार बताकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों के आय विवरण (इनकम एफिडेविट) की जांच की। पत्नी ने बताया कि उसके मासिक खर्च 20,000 रुपये हैं, जबकि बच्चे के लिए 10,000 रुपये अलग से लगते हैं। दूसरी तरफ, पति ने खुद को बेरोजगार बताकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पत्नी के वकील ने उसके बैंक खातों और इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) के जरिए सच्चाई उजागर कर दी। पता चला कि वह एरिक्सन कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और मासिक 1.5 लाख रुपये से ज्यादा कमाता है। उसके बैंक खातों में 2020 से 2023 तक 1 करोड़ रुपये से अधिक जमा हैं। इसमें सिटी बैंक में 52 लाख, एक्सिस बैंक में 21 लाख और बाकी खातों में भी मोटी रकम है। साथ ही, वह शेयर ट्रेडिंग से भी अच्छी कमाई कर रहा है।

यह है मामला
मामला 2017 में हुई शादी से जुड़ा है, जब शिकायतकर्ता पत्नी और आरोपी पति ने एक-दूसरे को अपनाया था। लेकिन, 2019 में विवादों के बाद पत्नी अपने मायके चली गई। पत्नी ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (डीवी एक्ट) की धारा 12 के तहत शिकायत दर्ज की, जिसमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण के आरोप लगाए गए। पत्नी का कहना है कि पति ने वित्तीय मदद रोककर उसे और बच्चे को परेशान किया, जबकि वह खुद बेरोजगार है और अकेले ही परिवार चला रही है।

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