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मुंबई की तरह दिल्ली में क्यों नहीं हुआ था पेड़ काटने का विरोध, डीएमआरसी ने इस प्लान पर किया था काम

Wed, 09 Oct 2019 05:03 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Wed, 09 Oct 2019 05:03 PM IST
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How Delhi Metro Rail Corporation managed to execute plan without cutting much trees
दिल्ली मेट्रो (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर स्टे लगा दी है। इसपर अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को होनी है। मेट्रो और पेड़ों के बीच चल रही इस खींच-तान के दौरान देश के एक बड़े हिस्से की नजर राजधानी दिल्ली पर भी है। लोगों की तरह आपके मन में भी यह सवाल उठ रहे होंगे कि दिल्ली में एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक तमाम मेट्रो लाइनें बिछी हुई हैं, लेकिन डीएमआरसी ने बिना पेड़ काटे या इतनी कम संख्या में पेड़ काट कर मेट्रो का निर्माण कैसे किया?

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बात 1988 की है जब दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने पहले तीन चरणों के निर्माण कार्य के लिए 31855 पेड़ काटे थे और बदले में 6636 पेड़ लगाए थे। पहले तीन चरणों में 350 किलोमीटर तक दिल्ली मेट्रो की लाइन बिछाई गई थी, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई देखकर लोग नाराज थे।
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इसके बाद डीएमआरसी ने राजोकरी के तट से सटे सुल्तानपुर में कार शेड निर्माण की योजना बनाई, जिसके लिए पहले से भी ज्यादा पेड़ काटे जाने की जरूरत थी। इसके बाद तो जैसे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों और सक्रीय समाजसेवियों ने इसका जमकर विरोध किया और डीएमआरसी को कार शेड की योजना पर दोबारा विचार करने पर विवश कर दिया। 
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डीएसआरसी के मुताबिक डीपो बनाने के लिए करीब 2.5 लाख स्क्वायर मीटर खाली स्थान की जरूरत होती है। यहां मेट्रो ट्रेनों की पार्किंग, मरम्मत, धुलाई-सफाई और सुरक्षा जांच के काम किए जाते हैं। खास कर ट्रेनों की पार्किंग व धुलाई यहां की जाती है।

इसे लेकर नाम न लेने की शर्त पर डीएमआरसी के अधिकारियों ने बताया कि चारों ओर से चल रहे विरोध के बीच डीएमआरसी के तत्कालीन एमडी ई श्रीधरन के कोलकाता मेट्रो के निर्माण के दौरान मिला अनुभव बहुत काम आया। इसके बाद डीएमआरसी ने उन इलाके के लोगों के साथ विशेष बैठक कर अपनी योजना साझा की, जिनके घरों के पास से मेट्रो लाइन गुजरना था। 

लोगों के साथ निर्धारित की गई बैठक के पहले चरण में प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता ने लोगों से सीधी बातचीत कर उन्हें हर छोटी-बड़ी जानकारी से अवगत कराया और योजना को विस्तृत रूप से समझाया। इस दौरान लोगों से योजना को लेकर सलाह मशवरा भी लिया गया। 

डीएमआरसी के मुताबिक वाजिब समस्या और उचित विकल्प होने पर निर्धारित योजना में बदलाव भी किए गए। इसके बाद सभी की सहमति और हितों का ध्यान रखते हुए दिल्ली मेट्रो की योजना को जन समर्थन के साथ आगे बढ़ाया गया।

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