'अपने ही मामले में कोई न्यायाधीश कैसे हो सकता है?'
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सीएनजी वाहन फिटनेस घोटाला मामले में उपराज्यपाल नजीब जंग और आम आदमी पार्टी की सरकार में तनातनी बढ़ गई है।
अबकी बार मनीष सिसोदिया ने विजिलेंस डिपार्टमेंट और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को भेजे गए नोट में उपराज्यपाल नजीब जंग को सीधे कटघरे में खड़ा किया है।
चार्जशीट दाखिल करने की स्वीकृति देने की खबर सामने आने का हवाला देकर यहां तक लिखा है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मामले में आरोप हो, वह उस मामले का न्यायाधीश कैसे हो सकता है?
जांच आयोग के नोटिस की सूची में जंग!
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में तैनात अतिरिक्त आयुक्त एसएस यादव को भेजे गए नोट में कहा है कि कैबिनेट की तरफ से मामले में जो जांच आयोग गठित किया गया है।
उसकी नोटिस की सूची में उपराज्यपाल का नाम होने की प्रबल संभावना सीबीआई की तरफ से आई रिपोर्ट के हिसाब से बनती है। पूरे मामले की रिपोर्ट 7 सितंबर सुबह 11 बजे तक देने के लिए कहा गया है। इस नोट की प्रति संबंधित जांच अधिकारी को भी भेजी गई है।
सिसोदिया ने लिखा है कि जांच आयोग यह भी जांच करेगा कि अभियोजन की स्वीकृति किस परिस्थिति में नहीं दी गई, इसकी भी जांच आयोग करेगा।
पूरे प्रकरण में जांच आयोग की तरफ से जिन लोगों को नोटिस भेजा जाएगा, उसमें उपराज्यपाल का नाम शामिल होने की संभावना है।
उपराज्यपाल पर उठाए हैं कई सवाल
मालूम हो कि मामले में दिल्ली सरकार जांच आयोग गठन को सही ठहराने के लिए लड़ रही है तो उपराज्यपाल के वकील इसे गलत ठहराने के लिए लड़ रहे हैं।
यह पहली बार है कि एक ही मामले में दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल की तरफ से दो अलग-अलग वकील नियुक्त किए गए हैं। मनीष सिसोदिया ने भेजे गए नोट में कहा है कि जांच आयोग गठन के कुछ दिन बाद ही एसीबी ने जांच बंद करके चार्जशीट दाखिल करने का निर्णय ले लिया गया।
सिसोदिया ने एसीबी से कई सवाल भी पूछे हैं। उसमें लिखा है कि चार्जशीट दाखिल करने की हड़बड़ी से मामला संदिग्ध लग रहा है। क्या एसीबी ने सीबीआई की तरफ से उपराज्यपाल पर लगे आरोपों की जांच की?