एनआरएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से बेबस हुए मरीज और तीमारदार
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत तैनात कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से जिले में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग में इन कर्मचारियों की कमी का नुकसान सबसे ज्यादा पीएचसी, सीएचसी में इलाज कराने पहुंचे मरीजों का हुआ। बीके सिविल अस्पताल में भी नॉन मेडिकल स्टाफ के हड़ताल पर होने से प्रशासनिक और कागजी काम प्रभावित हुआ। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों को भी पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी की वजह परेशानी का सामना करना पड़ा। पहले से घोषित हड़ताल के बावजूद सीएमओ की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा। पेश है गौरव चौधरी की रिपोर्ट:-
सुबह:11.30 बजे
बीके अस्पताल इमरजेंसी वार्ड
वार्ड में नर्सिंग स्टेशन पर मरीजों को इंजेक्शन और दवा देने के लिए कोई नर्स मौजूद नहीं थी। इस समय तीन घायल इमरजेंसी वार्ड पहुंचे हुए हैं लेकिन उनको प्राथमिक उपचार देने वाला कोई मौजूद नहीं है। तीमारदारों के जोर देने पर थोड़ी देर के बाद प्राइवेट नर्सिंग होम से ट्रेनिंग लेने आईं नर्सिंग छात्राओं ने मरीजों की देखभाल शुरू की। करीब 15 मिनट के बाद डॉक्टर पहुुचीं। घायलों को चेक कर कुछ इंजेक्शन और दवाएं लिखीं और मरहम पट्टी करने के निर्देश छात्राओं को देकर चली गईं।
सुबह:11.50 बजे
बीके अस्पताल की ओपीडी
खिड़की नंबर 22 पर मरीज और तीमारदारों की भीड़ जमा है। इन लोगों को ओपीडी के डॉक्टरों ने खून, एक्सरे, ईसीजी आदि जांच कराने को कहा है। इस जांच की पर्ची खिड़की नंबर 22 पर काटी जाती है। यहां पर्ची काटने वाला कर्मचारी ही नदारद था। कुछ तीमारदार दूसरे दिन जांच कराने की बात कह लौट गए, जबकि अधिकतर जरूरतमंद बाहर से जांच कराने चले गए।
दोपहर 12:00 बजे
एक्सरे विभाग भी खाली
एक्सरे विभाग में दो रेडियोलॉजिस्ट तो बैठे थे लेकिन पर्ची नहीं कटी होने की वजह से वह मरीजों का एक्सरे नहीं कर रहे थे। परेशान मरीज कभी खिड़की नंबर 22 जाते तो कभी किसी डॉक्टर से मिन्नत करते। फीस जमा करने की वैकल्पिक व्यवस्था न होने से बुधवार को फ्री वाले मरीजों को छोड़ किसी का एक्स रे नहीं हो सका।
दोपहर:12:15 बजे
गंभीर मरीज को इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार देनेे के बाद सफदरजंग अस्पताल दिल्ली रेफर कर दिया। 102 एंबुलेंस के लिए तीमारदार कर्मचारियों की मिन्नतें करते रहे। करीब 35 मिनट के बाद एंबुलेंस आई। इमरजेंसी के किसी पैरामेडिकल स्टाफ ने मरीज को एंबुलेंस तक नहीं पहुंचाया। तीमारदार ही किसी तरह मरीज को स्ट्रेचर पर लाद कर लाए और एंबुलेंस में चढ़ाया। इस दौरान कुछ और मरीज आए तो उन्हें इमरजेंसी वार्ड में स्ट्रेचर नहीं मिला। परिजनों ने मरीज को गोदी में उठाया और इलाज के डॉक्टर के पास ले गए।
हड़ताल का कारण
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डायरेक्टर ने 20 फीसदी कर्मचारियों को कम करने का आदेश जारी किया था। इसके मदद्ेनजर पूरे प्रदेश में दो दिन से हड़ताल जारी है। मालूम हो कि जिले में एनएचएम के तहत 668 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं जिलें में दो प्रथम रेफरल यूनिट, 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,16 शहरी प्राथमिक स्वास्थय केंद्र और 32 शहरी स्वास्थ्य केंद्र है। हड़ताल पर यहां पर काफी असर पड़ा है।