मौत के बाद भी अस्पताल नहीं लौटा रहा था लाश, पर क्यों?
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ये मामला फरीदाबाद की नीलम का है। 14 मार्च को नीलम की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। उसे सेक्टर-21 स्थित निजी अस्पताल में लाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसके दिमाग की नस फट गई है। पीड़िता का 15 व 16 मार्च को ऑपरेशन भी किया गया लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
ऑपरेशन के बाद पीड़िता की ओर से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं की गई। इसके बाद 19 मार्च को फिर से नीलम की तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है। परिजनों ने आरोप लगाते हुए बताया कि नीलम की मौत इसी दिन हो चुकी थी।
'पैसे बनाने के लिए मरीज को रखा वैंटिलेटर पर'
मृतका के भाई जोगिंदर का कहना है कि नीलम के कोई प्रतिक्रिया न करने के बाद भी अस्पताल ने अपने पैसे बनाने के लिए उसे वेंटिलेटर पर रखा। जोगिंद्र ने बताया कि रविवार को जब उसने शव देने के लिए कहा तो अस्पताल ने बताया कि 3.10 लाख रुपये और देने होंगे। इसके बाद ही शव को दिया जाएगा। इस पर परिजन अस्पताल प्रबंधन पर बिफर पड़े। क्योंकि पहले ही 3.80 लाख रुपये जमा कराए जा चुके थे।
परिजनों ने जमकर बवाल काटा
परिजन अस्पताल में हंगामा करने लगे। करीब दो घंटे से अधिक अस्पताल में
हंगामा होता रहा। ऐसे में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर
से एक प्रतिनिधि ने पीड़ित पक्ष को नो ड्यूज सर्टिफिकेट देने का आश्वासन
देकर शव सौंप दिया।
इस दौरान इस मामले पर अस्पताल के एमएस डॉ. हलाल अहमद और
प्रवक्ता धनंजय चौहान से कई बार फोन व एसएमएस कर संपर्क किया गया। लेकिन
अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में किसी भी प्रकार का बयान नहीं दिया
गया। वहीं सेक्टर-21 चौकी पुलिस के अनुसार परिजनों का हंगामा शांत करा दिया
गया था। परिजनों की ओर से कोई भी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।