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राजधानी के नाम की स्पेलिंग बदलने को राजी नहीं हैं इतिहासकार
Fri, 26 Jul 2019 06:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 26 Jul 2019 06:06 AM IST
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दिल्ली...
- फोटो : पीटीआई
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भाजपा सांसद विजय गोयल बेशक देश की राजधानी के अंग्रेजी के अक्षर विन्यास को बदलने की वकालत कर रहे हैं, लेकिन इतिहासकार उनसे इत्तेफाक नहीं रखते।
इतिहासकारों का मानना है कि यह मांग गैर जरूरी है। आम लोगों के बीच 'देलही' व %दिल्ली% दोनों नामों का चलन है। जबकि वैश्विक स्तर पर भी %देलही% का ही चलन है। स्पेलिंग में बदलाव, बेवजह भ्रम पैदा करेगा।
इतिहासकार इरफान हबीब बताते हैं कि लोग दोनों नामों का उच्चारण सहजता से कर लेते हैं। इसके साथ कोई विवाद भी नहीं है। ऐसे में फेरबदल का मतलब क्या है। देश में इससे कहीं बड़े दूसरे बहुत से मसले हैं, एक सांसद को इस पर अपना समय बेकार नहीं करना चाहिए।
इरफान हबीब का मानना है कि कुछ शताब्दी पहले हिंदी व उर्दू म़े शहर को %देहली% नाम से बुलाया जाता था। फिर %दिल्ली% के शब्द व्युत्पत्ति विज्ञान की जानकारी भी नहीं है। हालांकि, इस नाम के दूसरे के ई वर्जन भी हैं। अंग्रेजों के समय से चलन में आया %देलही% नाम भी मशहूर हो गया। हमें इस पर बेवजह का विवाद नहीं खड़ा करना चाहिए।
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स्वपना लिडले बताती हैं कि शहर के दोनों नाम %देलही% व %दिल्ली% लोगों में बराबर लोकप्रिय हैं। किसी भी नाम का इस्तेमाल करने से न तो कोई भ्रमित होता है और न ही इसे अन्यथा लेता है। नाम की स्पेलिंग में बदलाव की मांग अनावश्यक है। उन्होंने बताया कि शब्द कोश में %देलही% के पहले %देहली% %ढिल्लिका% जैसे क ई नामों से शहर को जाना गया।
उन्होंने सवाल किया कि हम अतीत में कितना पीछे जाएंगे? फिर यह तय कौन करेगा कि प्रामाणिक नाम कौन सा है? दिल्ली में नियमित तौर पर हेरिटेज वॉक का आयोजन करते आ रहे इतिहासकार सोहेल हाशमी इस मांग को अनावश्यक व समय बर्बाद करने वाला बताते है। हाशमी के मुताबिक, सौ साल से ज्यादा हो गए, जब से %न्यू देलही% को देश की राजधानी के नाम से जाना जाता है।
नाम की स्पेलिंग में बदलाव से इतिहास बदल जाएगा। इसके साथ ही बदलाव से लोगों में भ्रम फैलेगा। वहीं, वैश्विक स्तर पर मैप, एटलस, दूसरे जरूरी दस्तावेजों के रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग बदलना आसान नहीं होगा।
गौरतलब है कि राज्य सभा सांसद विजय गोयल ने बजट सत्र में मांग की थी कि %देलही% की स्पेलिंग बदलकर %दिल्ली% करनी चाहिए। उनकी दलील है कि भले ही इसका शब्द व्युत्पत्ति विज्ञान में संदर्भ नहीं मिलता, लेकिन लोक प्रचलित है कि मौर्य साम्राज्य के शासक राजा दिल्लू ने ईसा पूर्व पहली सदी में अपने नाम पर इस शहर का नाम रखा था।
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इतिहासकारों का मानना है कि यह मांग गैर जरूरी है। आम लोगों के बीच 'देलही' व %दिल्ली% दोनों नामों का चलन है। जबकि वैश्विक स्तर पर भी %देलही% का ही चलन है। स्पेलिंग में बदलाव, बेवजह भ्रम पैदा करेगा।
इतिहासकार इरफान हबीब बताते हैं कि लोग दोनों नामों का उच्चारण सहजता से कर लेते हैं। इसके साथ कोई विवाद भी नहीं है। ऐसे में फेरबदल का मतलब क्या है। देश में इससे कहीं बड़े दूसरे बहुत से मसले हैं, एक सांसद को इस पर अपना समय बेकार नहीं करना चाहिए।
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इरफान हबीब का मानना है कि कुछ शताब्दी पहले हिंदी व उर्दू म़े शहर को %देहली% नाम से बुलाया जाता था। फिर %दिल्ली% के शब्द व्युत्पत्ति विज्ञान की जानकारी भी नहीं है। हालांकि, इस नाम के दूसरे के ई वर्जन भी हैं। अंग्रेजों के समय से चलन में आया %देलही% नाम भी मशहूर हो गया। हमें इस पर बेवजह का विवाद नहीं खड़ा करना चाहिए।
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स्वपना लिडले बताती हैं कि शहर के दोनों नाम %देलही% व %दिल्ली% लोगों में बराबर लोकप्रिय हैं। किसी भी नाम का इस्तेमाल करने से न तो कोई भ्रमित होता है और न ही इसे अन्यथा लेता है। नाम की स्पेलिंग में बदलाव की मांग अनावश्यक है। उन्होंने बताया कि शब्द कोश में %देलही% के पहले %देहली% %ढिल्लिका% जैसे क ई नामों से शहर को जाना गया।
उन्होंने सवाल किया कि हम अतीत में कितना पीछे जाएंगे? फिर यह तय कौन करेगा कि प्रामाणिक नाम कौन सा है? दिल्ली में नियमित तौर पर हेरिटेज वॉक का आयोजन करते आ रहे इतिहासकार सोहेल हाशमी इस मांग को अनावश्यक व समय बर्बाद करने वाला बताते है। हाशमी के मुताबिक, सौ साल से ज्यादा हो गए, जब से %न्यू देलही% को देश की राजधानी के नाम से जाना जाता है।
नाम की स्पेलिंग में बदलाव से इतिहास बदल जाएगा। इसके साथ ही बदलाव से लोगों में भ्रम फैलेगा। वहीं, वैश्विक स्तर पर मैप, एटलस, दूसरे जरूरी दस्तावेजों के रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग बदलना आसान नहीं होगा।
गौरतलब है कि राज्य सभा सांसद विजय गोयल ने बजट सत्र में मांग की थी कि %देलही% की स्पेलिंग बदलकर %दिल्ली% करनी चाहिए। उनकी दलील है कि भले ही इसका शब्द व्युत्पत्ति विज्ञान में संदर्भ नहीं मिलता, लेकिन लोक प्रचलित है कि मौर्य साम्राज्य के शासक राजा दिल्लू ने ईसा पूर्व पहली सदी में अपने नाम पर इस शहर का नाम रखा था।