जिसके नाम पर बननी थी सड़क, परिवार भी ढूंढता है कहां है कब्र
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एक तरफ शनिवार को जहां देश वीर शहीदों की बदोलत स्वतंत्रता दिवस मनाएगा, वहीं वर्ष 2000 में कारगिल में शहीद हुए हींगनपुर के शहीद नसरुद्दीन को श्रद्धांजलि देने के बहाने आज तक कोई भी दो फूल चढाने नहीं पहुंचा।
इतना ही नहीं उस समय राज्य और केंद्र सरकार ने जो वादे किये थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं किया। जिसकी वजह से शहीद की पत्नी आसिया और पुत्र इरशाद के अलावा गांव के लोगों में रोष है।
करीब 15 साल पहले हरियाणा और केंद्र सरकार ने भी नसुरद्दीन का शहीद स्मारक बनाने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक कोई स्मारक नहीं बना। उनकी कब्र को कांटेदार झाडियों और बरसात के समय होने वाले खरपतवारों ने छुपा दिया है।
उनके शहीदी दिवस उनके परिवार को भी बडी मुश्किल से नसरुद्दीन की कब्र को ढूंडना पडता है। उस समय के पूर्व पशुपालन मंत्री मोहम्मद इलयास ने शाहचौखा से गांव हींगनपुर तक मार्ग और गांव औथा के हाई स्कूल को शहीद नसरुद्दीन के नाम से रखने का ऐलान किया था।
वहां से नसरुद्दीन का नाम हटा दिया गया
मंत्री के आदेश पर डीसी ने तुरंत हींगनपुर मार्ग और औथा हाईस्कूल पर शहीद नसरुद्दीन के नाम का बोर्ड लगा भी दिया था, लेकिन आज तक स्कूल और मार्ग को सरकार की तरफ से मंजूरी नहीं मिली। जिसकी वजह से वहां से नसरुद्दीन का नाम हटा दिया गया है।
शहीद की पत्नी आशिया कहती हैं कि उनका पति देश के लिये शहीद हुआ लेकिन सरकार उनकी कब्र पर कोई समाधी या स्मारक तक नहीं बना सकी।
लड़के के बडे होने सर सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था। इन वादों को पूरा करना तो दूर आज तक कोई राजनेता और प्रसाशन का अधिकारी उनका हालचाल पूछने तक नहीं आया है।
दो फूल भी चढ़ाने नहीं आया कोई
वहीं बेटा इरशाद का कहना है कि सभी शहीदों की याद में स्मारक बने हैं, उनको हर साल श्रद्धांजलि देने के लिये कोई न कोई सरकार का नुमाइंदा जाता है। पर उनके पिता को श्रद्धांजलि देने के लिये आज तक कोई नहीं आया।
गांव के रहने वाले महबूब कहते हैं कि सरकार ने शाहचौखा से हींगनपुर तक सडक और गांव औथा हाई स्कूल को नाम नसरुद्दीन के नाम से रखने की घोषणा की थी। पर कागजों में आज तक नहीं चढा।
एक समाजसेवी के मुताबिक मेवात के सपूत नसरुद्दीन का स्मारक क्यों नहीं बना। उस समय सभी शहीदों की पत्नी को पेट्रोल पंप, या गैस एजेंसी दी गई थी, लेकिन नसरुद्दीन कि विधवा को ये क्यों नहीं दिये गये।