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लूट से मरीजों को बचाएगा 'हीरा', निजी अस्पतालों के लिए ज्यादा कड़े नियम 

Sat, 10 Feb 2018 11:12 AM IST
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 10 Feb 2018 11:12 AM IST
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HIRA will save patients, robust rules for private hospitals

देश के पचास करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा लाभ देने से पहले सरकार इसे लेकर सख्त कानून लागू करना चाहती है। ताकि निजी अस्पतालों की लूट से मरीजों को बचाया जा सके। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को कुछ समय पहले जिम्मेदारी दी गई, जिस पर काम शुरू हो चुका है।

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सरकार ने इस कानून को हेल्थ इंश्योरेंस रेगुलेटरी अथॉरिटी (हीरा) नाम दिया है। सूत्र बताते हैं कि इस कानून के आने से इलाज के ज्यादा बिल बनाने वाले अस्पतालों पर पूरी तरह से लगाम लगेगी। 
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मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना भारत में शुरू होने से पहले निजी अस्पतालों के इलाज में लंबे बिल बनाकर बीमा कंपनियों से ज्यादा क्लेम लिया जाता है। गंभीर बात यह है कि इसे रोकने के लिए उपभोक्ता भी प्रयास नहीं करता।
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लेकिन सरकार ने 10 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य लाभ देने से पहले इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए कानून को लागू करने का फैसला किया है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि हीरा कानून को सरकार जल्द ही सदन में मंजूरी के लिए रख सकती है।

ये होगी कानून की खासियत

HIRA will save patients, robust rules for private hospitals
सांकेतिक चित्र

हीरा की खासियत यह होगी कि यह अस्पतालों को अनावश्यक जांच, प्रोसीजर और दवा लिखकर मरीजों से पैसे वसूलने से रोकेगा। इसके लिए एनएचपीएस के बीमे के तहत इंप्लांट, दवा और कंज्युमेबल्स की गुणवत्ता और कीमत भी निर्धारित होगी, जिसके बाद अस्पताल इन चीजों के तय से ज्यादा कीमत नहीं वसूल सकेंगे।

इसके लिए सरकार ने सभी स्टेक होल्डर से विचार-विर्मश और मॉडल स्टडी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य बीमा लाभार्थी मरीज जब अस्पताल पहुंचेगा कवर वैल्यू के साथ अस्पताल को मरीज की केस हिस्ट्री हीरा को देनी होगी। इसमें बीमारी और इलाज से लेकर तमाम जानकारी उपलब्ध होगी।

इसके बाद हीरा अस्पताल की हिस्ट्री और मरीज की हालत देख इलाज उक्त अस्पताल या कहीं और कराने का फैसला लेगा। हीरा से क्लियरेंस मिलते ही अस्पताल मरीज का इलाज शुरू करेगा। 

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