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हिंदू-मुस्लिम परिवार ने दी भाईचारे की मिसाल, महिलाओं ने एक -दूसरे के पति को किडनी देकर बचाई जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 15 Jun 2018 05:32 PM IST
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भाईचारे की मिसाल कायम की
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्धनगर जिले के नोएडा में हिंदू-मुस्लिम परिवार ने एक बार फिर से भाईचारे की नई मिसाल दी है। एक हिंदू और एक मुस्लिम महिला ने एक-दूसरे के पति को किडनी देकर उनको नया जीवन दिया है।
हिंदू मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप मुस्लिम मरीज और मुस्लिम मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप हिंदू मरीज के साथ मैच हो रहा था। ऐसे में मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टर ने इन्हें एक-दूसरे के पति को किडनी देने का सुझाव दिया, जिसके बाद ऑपरेशन किया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट ने न सिर्फ दो मरीजों की जान बचाई है, बल्कि समाज को आपसी सद्भाव का संदेश दिया है।
जेपी अस्पताल के डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट ने बताया कि 53 वर्षीय इकरम और 43 वर्षीय अनिल कुमार राय की किडनी हाई ब्लड प्रेशर के कारण खराब हो गई थी।
सही डोनर न मिल पाने की वजह से दोनों की जिंदगी जोखिम में थी। दोनों परिवार अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। अस्पताल प्रशासन ने दोनों परिवारों से मिलकर उन्हें बताया कि दोनों मरीजों की पत्नी एक -दूसरे की जान बचा सकती हैं।
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हिंदू मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप मुस्लिम मरीज और मुस्लिम मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप हिंदू मरीज के साथ मैच हो रहा था। ऐसे में मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टर ने इन्हें एक-दूसरे के पति को किडनी देने का सुझाव दिया, जिसके बाद ऑपरेशन किया गया।
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डॉक्टरों का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट ने न सिर्फ दो मरीजों की जान बचाई है, बल्कि समाज को आपसी सद्भाव का संदेश दिया है।
जेपी अस्पताल के डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट ने बताया कि 53 वर्षीय इकरम और 43 वर्षीय अनिल कुमार राय की किडनी हाई ब्लड प्रेशर के कारण खराब हो गई थी।
सही डोनर न मिल पाने की वजह से दोनों की जिंदगी जोखिम में थी। दोनों परिवार अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। अस्पताल प्रशासन ने दोनों परिवारों से मिलकर उन्हें बताया कि दोनों मरीजों की पत्नी एक -दूसरे की जान बचा सकती हैं।
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दोनों डोनर और दोनों मरीज ठीक हैं
दोनों परिवारों को किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में पूरी जानकारी दी गई। उसके बाद लीला राय (अनिल राय की 34 वर्षीय पत्नी) और बालो (इकरम की 47 वर्षीय पत्नी) एक-दूसरे के पति को किडनी देने के लिए तैयार हो गईं।
डॉ. अमित देवरा ने बताया कि सर्जरी के बाद दोनों डोनर और दोनों मरीज ठीक हैं। डोनर बालो और लीला को सर्जरी के कुछ ही दिन बाद छुट्टी दी गई। वहीं दोनोें मरीजों को ट्रांसप्लांट के 12 दिन बाद छुट्टी दी गई है।
मुजफ्फनगर से आए मरीज इकरम ने बताया कि मुझे बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की किडनी चाहिए थी, लेकिन मेरी पत्नी का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था। डॉक्टरों ने हमें अनिल के परिवार से मिलवाया और किडनी ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया।
हम तुरंत इस बात से सहमत हो गए। वहीं मरीज अनिल कुमार ने बताया बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर से दिल्ली-एनसीआर में आने का फैसला किया था। यहां पर जेपी अस्पताल में आकर मैं इकरम और उनकी पत्नी से मिला। वे भी हमारी जैसी समस्या से जूझ रहे थे।
डॉ. अमित देवरा ने बताया कि सर्जरी के बाद दोनों डोनर और दोनों मरीज ठीक हैं। डोनर बालो और लीला को सर्जरी के कुछ ही दिन बाद छुट्टी दी गई। वहीं दोनोें मरीजों को ट्रांसप्लांट के 12 दिन बाद छुट्टी दी गई है।
मुजफ्फनगर से आए मरीज इकरम ने बताया कि मुझे बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की किडनी चाहिए थी, लेकिन मेरी पत्नी का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था। डॉक्टरों ने हमें अनिल के परिवार से मिलवाया और किडनी ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया।
हम तुरंत इस बात से सहमत हो गए। वहीं मरीज अनिल कुमार ने बताया बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर से दिल्ली-एनसीआर में आने का फैसला किया था। यहां पर जेपी अस्पताल में आकर मैं इकरम और उनकी पत्नी से मिला। वे भी हमारी जैसी समस्या से जूझ रहे थे।