फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Hindon pain: ask not ... brother Logan overnight Nai Gam Codno Pdu

हिंडन का दर्द : भाई मत पूछ...रातू-रात लोगन नै गाम छोडणो पड़ौ 

Mon, 30 May 2016 12:58 AM IST
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 30 May 2016 12:58 AM IST
विज्ञापन
Hindon pain: ask not ... brother Logan overnight Nai Gam Codno Pdu
हिंडन - फोटो : राजन राय
अरै...भाई सन् अटैहत्तर की रात कूण भूल जायगौ। वा रात कू तो एकदम हाथी डुबाव पाणी आ गयौ और हिंडन की रौ (बाढ़) में गौम (गांव) के लोग भै लिकड़े (बह गए)। काई की खाट बह गयी तो काई के डंगर (मवेशी) भै गए।
विज्ञापन


वर्ष 1978 में हिंडन की बाढ़ को याद करते हुए ग्रेटर नोएडा के घरबरा निवासी 92 वर्षीय बुजुर्ग सुल्ला प्रधान यादों में खो जाते हैं। यहां यमुना ने भी कहर बरपाया था।यादों को फिर से टटोलते हुए उन्होंने कहा कि रातूरात लोगन नै गाम छोड़णो पड़ौ और चार महीनौ तक बांगर के गामौ में रहकर टैम(समय) काटौ हौ।
विज्ञापन


सुल्ला प्रधान का कहना है कि वह चार महीने ऐसे लगे जैसे के 40 साल हो गए। बच्चों को रिश्तेदारी में छोड़ दिया गया। पूरे गांव में  पानी ही पानी था। ग्रामीणों को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


 उनका कहना है कि उस समय आई बाढ़ को याद कर आज भी रोंगटे खडे़ हो जाते हैं। बाढ़ में कई परिवार तो पूरी तरह बरबाद हो गए। फिर से 20-22 गांव के लोग ने खून पसीना बहाया और खुद को स्थापित किया। 

बांध बनने के बाद मिला मुश्किलों का हल
ग्रामीणों का कहना है कि बांध बनने के बाद पिछले 25 वर्ष में कोई बहुत बड़ा खतरा नहीं आया। लेकिन यमुना के उफनने पर हिंडन से पहले से ज्यादा खतरा पिछले कुछ वर्षों में दिखा है। नदियों के सूखने और छोटी होने पर भी वह बेहद चिंतित हैं और इसे रोकने के लिए प्रशासन से सहयोग की अपील करते हैं। वहीं इसकी जवाबदेही तय करने की भी बात करते हैं। 

बारिश और ग्लेशियर पर निर्भर हो गई नदियां
पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ का कहना है कि नदियां शहरों और गांवों की जरूरत को पूरा करती हैं। यमुना और हिंडन भी इस जरूरत को पूरा कर सकती थीं। लेकिन इसे मार दिया गया। अब हम गंगाजल पर निर्भर हो गए हैं। यही नहीं, नदियां भी अब बारिश और ग्लेशियर पर निर्भर हो गई, अगर बारिश ठीक ठाक नहीं हुई तो यह नदियां मृत अवस्था में रहती हैं।

पानी सूख गया और जंगल भी नहीं रहे
पर्यावरणविदों की मानें तो नदियों में पानी रहने से आसपास जंगल विकसित होता है। यह आसपास के क्षेत्रों में तापमान को कम करता है लेकिन यमुना और हिंडन के मामलों में मामला उलटा है। यहां नदियां नाला हो गई और पानी सूख गया। यही नहीं जहां पेड़ होने चाहिए। वहां अतिक्रमण कर मकान बना लिए गए। लिहाजा अगर फिर से बाढ़ आती है तो डूबने का खतरा तो है ही।


धार मोड़ने पर हो सकता है खतरा
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास कार्य की वजह से होने वाले निर्माण के लिए हिंडन की धार को भी मोड़ा जा रहा है। सेक्टर-150 सफीपुर में रेलवे ब्रिज बनाने के लिए हिंडन की धार को सीधा कर दिया गया है, जबकि यहां धार तीन से चार किलोमीटर तक मुड़ कर जाती है। अब अगर भारी बारिश होती है तो यह धार फिर से अपने पुराने रास्ते पर जाएगी और खतरा पैदा करेगी। इस बाबत एनजीटी ने नोटिस भी जारी किया है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed