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हिंदी हैं हम अभियान... रोजगार की भाषा बन चुकी है हिंदी : त्रिपाठी
Sun, 13 Sep 2020 06:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 13 Sep 2020 06:58 AM IST
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हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
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दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी सीखकर सैकड़ों लोग आज विदेशों में हिंदी पढ़ा रहे हैं। राजभाषा अनुभाग के अंतर्गत रेलवे और बैंक में काम कर रहे हैं। मीडिया संस्थानों, डिजिटल और कंप्यूटरीकृत संस्थानों में भी अनुवादक के तौर पर लोगों को रोजगार मिला है। कुल मिलाकर कहें तो हिंदी का दायरा अब बड़ा हो गया है, लेकिन युवाओं को इसकी सूचना पहुंचाने में हम अब भी चूक रहे हैं।
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हिंदी रोजगार की भाषा बन चुकी है, युवा पीढ़ी को यह बात समझाने की आवश्यकता है। एक शिक्षक होने के नाते अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहा हूं। ‘अमर उजाला’ द्वारा चलाए जा रहे ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध महाराजा अग्रसेन कॉलेज में हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. त्र्यंबक नाथ त्रिपाठी ने यह बातें कहीं।
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उन्होंने बताया कि वे आठ साल से शिक्षण कार्य के साथ-साथ भाषा विज्ञान और अनुवाद के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने मुंशी प्रेमचंद द्वारा हिंदी में अनुवादित ईसाई धर्म के एक संत के अहंकार और उसके पतन की मार्मिक कहानी पर आधारित रचना ‘अहंकार’ के नए संस्करण का संपादन किया है। साथ ही हिंदी के महान साहित्यकार बनारसीदास चतुर्वेदी, पंडित जगन्नाथ प्रसाद मिश्र, सियाराम शरण समेत कई अन्य साहित्यकारों द्वारा पश्चिमी विचारकों पर लिखे गए साहित्य का मूल्यांकन किया है, जिसका लाभ युवा पीढ़ी उठा सकेगी।
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जीवन पर्यंत काम आएगी नई शिक्षा नीति
डॉ. त्रिपाठी ने नई शिक्षा नीति-2020 की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे एक ऐसी जमीन तैयार होगी, जो जीवन पर्यंत हमारे काम आएगी। आने वाले समय में बच्चे अपनी मातृभाषा हिंदी में अपनी बात बेहतर ढंग से कह पाएंगे। अभी वैश्विक पटल पर अंग्रेजी के दबाव का असर युवाओं पर भी दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे युवा इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अपनी जमीन को समृद्ध करना आवश्यक है। सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच हिंदी का इस्तेमाल बढ़ा है। यह बेहतर भविष्य की ओर एक इशारा है।