फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   hindi hain hum amar ujala initiative krishna travel all india for hindi promotion

हिंदी हैं हमः देश में घूमकर कृष्णा कर रहीं हैं हिंदी का प्रचार, गैर-भाषी क्षेत्रों में हिंदी बोलने का है अनूठा शौक

Sat, 29 Aug 2020 05:07 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 29 Aug 2020 05:07 PM IST
विज्ञापन
hindi hain hum amar ujala initiative krishna travel all india for hindi promotion
डॉ. कृष्णा जैमिनी - फोटो : अमर उजाला

केरल हो या तमिलनाडु सभी गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में जाकर हिंदी बोलने और हिंदी की विशेषताओं का गुणगान करने का खास शौक रखती हैं हिंदी साहित्यकार डॉ. कृष्णा जैमिनी। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत हिंदी साहित्यकार डॉ. कृष्णा जैमिनी ने बताया कि हिंदी भारत के सभी स्थानों पर बोली और समझी जाती है।

विज्ञापन


संपर्क का सर्वाधिक साधन है हिंदी। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। यह जैसे बोली जाती है, वैसे ही लिखी भी जाती है। उन्होंने बताया कि गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी हिंदी में बात करते हुए जब उन्हें हिंदी में उत्तर मिलता है तो उन्हें सुकून मिलता है। फिर चाहे वो पूर्वोत्तर भारत का शिलांग का नेहू विश्व विद्यालय हो, कन्याकुमारी, रामेश्वर हो, उड़ीसा या गुजरात उन्हें सब जगह हिंदी परचम मिला।
विज्ञापन


कृष्णा जैमिनी ने शब्दों, माहियाचंद, दोहाचंद, व्रज में मन करत विहार, हरियाणवी लोग गीत सहित कई पुस्तकें लिख चुकी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सेक्टर-4/8 मॉडल टाउन से हिंदी शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बचपन से ही हिंदी की शौकीन कृष्णा को कई मंचों पर हिंदी की जगह अंग्रेजी बोलने के लिए कहा गया तो उनका प्रेम हिंदी के प्रति और बढ़ा। मना करने पर भी वे हमेशा हिंदी में बेवाक हो कर बोलती। उन्होंने बताया कि कि हिंदी जो आदर सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा है। इसके लिए हम हिंदी भाषी ही उत्तरदायी हैं।

नई शिक्षा नीति में भी हिंदी की अनिवार्यता पर ध्यान नहीं दिया गया। तीन भाषाओं में से एक भाषा चुनने का विकल्प हिंदी के लिए निसंदेह हानिकारक है। इससे हिंदी प्रेमियों को धक्का अवश्य लगा है। अंग्रेजी भाषा के मोहजाल में फंसे लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी भाषा माध्यम के बड़े बड़े विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। इन विद्यालयों में हिंदी विषय की जगह अन्य भाषाएं ( विदेशी) पढ़ते हैं।

दूसरी तरफ अगर विदेशों में हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनने की दावेदार है। भारत के अलावा मारीशस, सूरीनाम, फिजी और अमेरिका में अधिक प्रचलित है। मारीशस में विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित होते हैं जिसमें अनेक देशों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं।


हिंदी के प्रयोग पर करें गर्व महसूस
डॉ. कृष्णा जैमिनी का कहना है कि भारतीयों को हीन भावना छोड़कर हिंदी के प्रयोग पर गर्व महसूस करना होगा। शिक्षा के सभी स्तरों पर हिंदी माध्यम को अपनाना होगा। हिंदी में दक्षता, नियुक्ति, पदोन्नति एवं विकास यात्रा के साथ-साथ इसे जोड़ना होगा। हिंदी को उचित स्थान दिलाने के लिए आवश्यक है कि हम इसके उत्थान और विकास के बारे में सोचें। हिंदी के लिए नीति और गति निर्धारित करें तभी हम हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दिला पाएंगे। आज हमें हिंदी को आत्मा से और मन से स्वीकार कर उसके विकास की बात करें तभी हम भारतीय होने के साथ अच्छे हिंदी जन कहला पाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed