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जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, कहा जल्द निकालें समाधान नहीं तो होगी कार्रवाई

Fri, 02 Sep 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Sep 2016 12:03 AM IST
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Highcourt strict on waterlogged in delhi, gave oinstrucition
बारिश से बेहाल दिल्ली - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने राजधानी में जलभराव व नालों की सफाई के मुद्दे पर दिल्ली सरकार व तीनों एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि उनकी नाकामी के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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जलभराव का मुख्य कारण नालियों में भरा प्लास्टिक कचरा है। अदालत ने सरकार को एक सप्ताह में बैठक करके इसका समाधान निकालने का निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अवमानना की कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
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गौरतलब है कि बुधवार को भी एक खंडपीठ ने जलभराव पर फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने कुछ दिन पहले व बुधवार को हुए जलभराव को गंभीरता से लेते हुए कहा कि राजधानी का ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं है। 
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प्लास्टिक कचरा नालियों में भरा रहता है, जिससे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। अदालत ने कहा कि कोई भी एजेंसी काम नहीं करना चाहती, बल्कि एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता जा रहा है।

सरकार ने उपराज्यपाल और एमसीडी पर फोड़ा ठीकरा

Highcourt strict on waterlogged in delhi, gave oinstrucition
अरविंद केजरीवाल और गोपाल राय - फोटो : अमर उजाला
अदालत ने सरकार को एक सप्ताह में प्लास्टिक प्रबंधन सलाहकार कमेटी के साथ बैठक कर दिशा निर्देश व समाधान निकालने का निर्देश दिया है। कमेटी को तीन सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में बैठक नहीं हुई, तो पीडब्ल्यूडी के सचिव अदालत की अवमानना कार्रवाई के लिए तैयार रहें। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नालियों का औचक निरीक्षण करें।

उपराज्यपाल और एमसीडी पर फोड़ा ठीकरा
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल मेहरा ने जलभराव व कामकाज न होने का ठीकरा उपराज्यपाल व एमसीडी पर फोड़ा। 

उन्होंने उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के अधिकारों की लड़ाई को लेकर हाईकोर्ट द्वारा 4 अगस्त को दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पहले दो अथॉरिटी थीं, लेकिन फैसले के बाद एक ही अथॉरिटी रह गई है। 

अदालत में बच्चे की मौत का भी उठा मामला

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उन्होंने कहा कि अब अधिकारी सरकार की सुन ही नहीं रहे, कोई भी काम कहें तो वे काम नहीं कर रहे, हम असहाय हैं। बावजूद इसके सरकार अपने स्तर पर आम लोगों की परेशानियों को देखते हुए काम कर रही है। 

उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी के पास बहुत ही कम सड़कें हैं और अधिकांश एमसीडी के पास हैं। एमसीडी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही, इसी कारण हालत खराब हो रहे हैं। एमसीडी के अधिवक्ता ने उनके तर्क पर आपत्ति जताई तो अदालत ने कहा कि एमसीडी की जिम्मेदारी ज्यादा है, आप काम नहीं कर रहे।

‘मृतक के परिवार को दें मुआवजा’
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष शकूरपुर में खुली नाली में आठ साल के बच्चे के गिरने का मामला उठा। बच्चे की मई में मौत हो गई थी। अदालत ने कहा कि यह गंभीर मामला है। 

अदालत ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द पीड़ित परिवार को मुआवजा प्रदान करें। इसके अलावा नाली खुली होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर तीन सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करें।

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