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Delhi NCR News: एसएससी महिला अधिकारियों की सेवा समाप्ति पर हाईकोर्ट की रोक
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1 जुलाई तक सेवा में बनी रहेंगी अधिकारी, स्थायी कमीशन से जुड़े विवाद पर होगी सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय वायु सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) महिला अधिकारियों को सेवा से हटाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की एकल पीठ ने सोमवार को याचिकाकर्ता अधिकारियों को 1 जुलाई तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी। मामले की अगली सुनवाई रोस्टर बेंच के समक्ष होगी।
महिला अधिकारियों ने वायु सेना के स्थायी कमीशन (पीसी) न देने के निर्णय को चुनौती दी है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा मिलने के बावजूद वायु सेना ने 3 जून को सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिए। अधिकारियों का आरोप है कि ये आदेश उस समय जारी किए गए, जब दिल्ली हाईकोर्ट और आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा था, जिससे उन्हें कानूनी राहत लेने का अवसर नहीं मिल सका। उनका यह भी कहना है कि एएफटी में उनकी याचिकाओं पर सुनवाई से पहले ही सेवा समाप्ति के आदेश पारित कर दिए गए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सेवा से हटाए जाने से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी और एएफटी या हाईकोर्ट में उचित कानूनी उपाय अपनाने की अनुमति भी दी थी। सर्वोच्च अदालत ने अपने अंतिम फैसले में 2023 और 2024 में स्थायी कमीशन के आवेदन खारिज होने वाले अधिकारियों को कानूनी विकल्प अपनाने की छूट दी थी। साथ ही स्पष्ट किया था कि संबंधित मामलों के लंबित रहने तक सेवा समाप्ति के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा जारी रहेगी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फिलहाल सेवा समाप्ति पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 1 जुलाई तय की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय वायु सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) महिला अधिकारियों को सेवा से हटाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की एकल पीठ ने सोमवार को याचिकाकर्ता अधिकारियों को 1 जुलाई तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी। मामले की अगली सुनवाई रोस्टर बेंच के समक्ष होगी।
महिला अधिकारियों ने वायु सेना के स्थायी कमीशन (पीसी) न देने के निर्णय को चुनौती दी है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा मिलने के बावजूद वायु सेना ने 3 जून को सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिए। अधिकारियों का आरोप है कि ये आदेश उस समय जारी किए गए, जब दिल्ली हाईकोर्ट और आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा था, जिससे उन्हें कानूनी राहत लेने का अवसर नहीं मिल सका। उनका यह भी कहना है कि एएफटी में उनकी याचिकाओं पर सुनवाई से पहले ही सेवा समाप्ति के आदेश पारित कर दिए गए।
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सेवा से हटाए जाने से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी और एएफटी या हाईकोर्ट में उचित कानूनी उपाय अपनाने की अनुमति भी दी थी। सर्वोच्च अदालत ने अपने अंतिम फैसले में 2023 और 2024 में स्थायी कमीशन के आवेदन खारिज होने वाले अधिकारियों को कानूनी विकल्प अपनाने की छूट दी थी। साथ ही स्पष्ट किया था कि संबंधित मामलों के लंबित रहने तक सेवा समाप्ति के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा जारी रहेगी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फिलहाल सेवा समाप्ति पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 1 जुलाई तय की है।
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