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हाईकोर्ट: केंद्र सरकार के दबाव में काम न करे पुलिस

Thu, 21 Jan 2016 11:12 AM IST
Updated Thu, 21 Jan 2016 11:12 AM IST
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High Court: police does not work in the force of government

राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर अदालत ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिसकर्मियों की भर्ती क्यों नहीं करते, पैसा क्या आप की जेब से जा रहा है। इतना ही नहीं अदालत ने पुलिस को भी नसीहत दी कि केंद्र के दबाव में काम न करें। सुरक्षा के मद्देनजर वे स्वतंत्र रूप से काम करें।

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न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने महिला सुरक्षा मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस व केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पेश जवाब को गंभीरता से लिया। पुलिस के अधिवक्ता ने बताया कि हमने केंद्र को 14 हजार पुलिसकर्मी की भर्ती करने की सिफारिश की थी लेकिन सरकार ने इस संख्या को घटाकर 4227 कर दिया।

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वहीं, गृहमंत्रालय ने कहा की हमने 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती की अनुमति दे दी थी लेकिन वित्त मंत्रालय ने मात्र 4227 पुलिस कर्मियों की भर्ती के लिए ही हामी भरी थी। लेकिन अब एक बार फिर फंड न होने की बात कहकर रोड़ा अटका रहा है।
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हमें पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है

High Court: police does not work in the force of government

इस जवाब पर नाराजगी जताते हुए कहा खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा की वह क्यों दिल्ली में पुलिसिंग बेहतर करने के लिए काम नहीं कर रही है। जब गृहमंत्रालय ने पुलिसकर्मियों की भर्ती के लिए रजामंदी दे दी है तो अब यह देखना वित्त मंत्रालय का काम है कि वह इसके लिए फंड कहां से लाए। अदालत ने कहा की फंड न होने की बात को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि हमें पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।


अदालत ने पुलिस को भी नसीहत दी कि उनकी जिम्मेदारी है कि लोगों को सुरक्षा प्रदान करने की है। आप किसी की दबाव में काम करने की अपेक्षा स्वतंत्र रूप से काम करें। यह महत्वपूर्ण मुद्दा है। राजधानी में शाम सात बजे के बाद महिलाएं सुरक्षित नहीं है। एक छोटा सा अपराध बड़ा रूप ले लेता है।

अदालत ने कहा आप इस मामले में केंद्र सरकार पर निर्भर न रहें। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है की राजधानी में लोगों के लिए किस अनुपात में पुलिसकर्मी होने चाहिए। अदालत ने साफ कहा की इस बारे में उनके समक्ष सही आंकड़े प्रस्तुत किए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।

सीसीटीवी नहीं लगने दे रही केंद्र सरकार

High Court: police does not work in the force of government

दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि केंद्र सरकार सीसीटीवी लगाने के लिए 450 करोड़ रुपये खर्च करना नहीं चाहती और दिल्ली सरकार को भी 20 करोड़ की लागत से कैमरे नहीं लगाने दे रही है। अधिवक्ता ने कहा की अगर केंद्र सरकार दिल्ली पुलिस को संभालना नहीं चाहती तो उस पर नियंत्रण छोड़ दें। दिल्ली सरकार यह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है।


अदालत ने कहा की पिछले तीन साल से पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने का मामला चल रहा है। लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की पूर्व में किसकी सरकार थी। अदालत ने कहा की सीसीटीवी लगाने के लिए 450 करोड़ रुपये खर्च करना किसी मॉल बनाने से कम खर्चीला काम है।

पेश मामले में 16 दिसंबर 2012 वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म कांड के बाद हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था। इस मामले में पुलिसकर्मियों की संख्या व फोरेंसिक साइंस लैब बढ़ाने को लेकर निर्देश दिए गए हैं।

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