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केंद्र और एडब्ल्यूबीआई को नोटिस: हाईकोर्ट ने इस याचिका पर मांगा जवाब, नौ नवंबर को होगी सुनवाई
Fri, 29 Jul 2022 02:42 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 29 Jul 2022 02:42 PM IST
सार
याची ने कहा कि गलत प्रजनन पद्धति और असफल पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के कारण कुत्तों की आबादी बढ़ रही है। तर्क दिया कि एडब्ल्यूबीआई अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन नहीं कर रहा और गलत तरीके से अनुदान दे रहा है।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) से रेबीज विरोधी टीकाकरण और जानवरों के जन्म नियंत्रण के मुद्दों को लेकर दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई नौ नवंबर तय की है।
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मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने जनहित याचिका पर केंद्र, बोर्ड के अलावा भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक, भारतीय पशु चिकित्सा परिषद और पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता संगीता डोगरा ने दावा किया कि उसकी याचिका पशु जन्म नियंत्रण और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रमों के कथित कुप्रबंधन और पशु कल्याण के लिए सरकारी अनुदान के गबन के संबंध में है।
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याचिका के अनुसार, एडब्ल्यूबीआई अनैतिक पशु चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ा रहा है और पशु कल्याण की गलत व्याख्या कर रहा है। एडब्ल्यूबीआई जानबूझकर उन गतिविधियों में शामिल है, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। मसलन ब्रीडिंग लाइसेंस, फीडर, केयर टेकर कार्ड जारी करना, एबीसी और एआरवी के लिए निविदाएं जारी करना आदि।