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'उस रात रजामंदी से नहीं बने थे संबंध'

Thu, 15 May 2014 08:36 AM IST
Updated Thu, 15 May 2014 08:36 AM IST
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high court gets angry on increasing rape cases in delhi

राजधानी में गैंगरेप की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है। हाईकोर्ट ने भी ऐसे मामलों को महिलाओं के प्रति सबसे बर्बर व गंभीर अपराध माना है।

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अदालत ने कहा कि यह किसी महिला विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ अपराध है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि ट्रायल के दौरान पीड़िता बयान से मुकर भी जाती है और सबूत हैं तो उसके मुकरने से कोई असर नहीं पड़ता।
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हाईकोर्ट ने गैंगरेप के दो व रेप के एक मामले में दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी सजा को बहाल रखा है।

केस 1: युवती से बस में गैंगरेप

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पहला मामला बदरपुर थाना क्षेत्र का है। 20 मई 2001 को रात करीब 9.30 बजे युवती बदरपुर बॉर्डर से बदरपुर जाने के लिए बस में चढ़ी थी। बस में जब वह अकेली रह गई तो ड्राइवर सहित तीन युवकों ने सुनसान जगह पर बस खड़ी कर उससे गैंगरेप किया।

निचली अदालत ने दोषियों को 10-10 वर्ष की कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। दोषी पुष्पेंद्र व आदेश दुबे ने हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर के समक्ष फैसले को चुनौती दी।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि युवती ट्रायल के दौरान बयानों से मुकर गई थी। इसलिए उनके मुवक्किलों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। हालांकि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों के आधार पर अपराध साबित करने में सफल रहा है। कोर्ट ने कहा कि दोषियों का अपराध देखते हुए उनकी सजा कम नहीं की जा सकती।

केस 2: किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म

high court gets angry on increasing rape cases in delhi

दूसरा मामला टीकरी गांव का है। 15 वर्षीय किशोरी मां के साथ 15 अगस्त 2005 को निर्माणाधीन स्कूल में गई थी। वहां, इलेक्ट्रीशियन का काम करने वाले बबलू व मिस्त्री राम चरण ने उससे गैंगरेप किया। निचली अदालत ने दोनों को 10-10 वर्ष कैद व जुर्माने की सजा सुनाई थी।

दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर स्वयं को निर्दोष बताया था। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने दोषियों के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उन्होंने पीड़िता की मां को 10 हजार रुपये लोन दिया था। रुपये वापस मांगने पर उन्हें फर्जी मामले में फंसाया गया है।

अदालत ने उनके इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि 15 अगस्त को अवकाश रहता है। अदालत ने कहा कि कुछ ठेकेदार 15 अगस्त को भी काम करवाते हैं। अदालत ने कहा कि इस गंभीर आरोप के दोषियों से सहानुभूति नहीं बरती जा सकती।

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केस 3: बेटे के सामने मां से रेप

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तीसरा मामला पहाड़गंज क्षेत्र का है। आरोप है कि एक मई 2012 को दोषी अमर सिंह ने पीड़ित महिला के घर में घुस कर उसके 9 वर्षीय बेटे की मौजूदगी में उससे रेप किया। निचली अदालत ने उसे एक अक्तूबर 2013 को सात वर्ष की कैद व जुर्माने की सजा सुनाई थी।

आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। न्यायमूर्ति मुरलीधर ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि दोनों की रजामंदी से संबंध बने थे।

अदालत ने कहा कि पीड़िता व उसके बेटे के बयान से दोषी का अपराध साबित हुआ है। अदालत ने कहा कि उनके बीच पहले कैसे भी संबंध रहे हो लेकिन घटना वाली रात उनके बीच रजामंदी नहीं थी। उसकी अपील स्वीकार नहीं की जा सकती।

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