'ऐसे ना तोड़े झुग्गियां इसके लिए बने प्रोटोकॉल'
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सभी स्थानीय निकाय मिलकर भविष्य में स्लम क्लस्टर में तोड़फोड़ करने के लिए एक प्रोटोकॉल तय करे। प्रोटोकॉल बनाते हुए लोगों के संवैधानिक अधिकारों का भी ध्यान रखा जाए।
अदालत ने हाल ही में शकूर बस्ती सीमेंट साइट में क्लस्टर में की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई पर नाखुशी जताते हुए यह निर्देश दिया। इतना ही नहीं अदालत ने इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों के खाने-पीने सहित सभी सुविधाएं मुहैया करवाने का निर्देश देते हुए बच्चों की नष्ट हुई पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध करने को कहा है।
न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति विभु बाखरू की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी निकायों को मिलकर चार सप्ताह में इस संबंध में प्रोटोकॉल तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि प्रोटोकॉल तय होते तो इस प्रकार की कार्रवाई से बचा जा सकता था।
सभी पक्षों को हाईकोर्ट ने जमकर फटकारा
खंडपीठ ने मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए सभी पक्षों को फटकार भी लगाई। एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि झग्गियों में तोड़फोड़ के बाद वहां रह रहे स्थानीय लोगों के खाने-पीने की उचित व्यवस्था नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि एनएचआरसी द्वारा उठाए गए मुद्दों का तुंरत समाधान किया जाए और दिल्ली सरकार स्कूली बच्चों को स्कूल बैग उपलब्ध करवाने के अलावा उनकी कॉपी-किताबें इत्यादि का तुंरत प्रबंध करे।
इससे पूर्व दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) ने कहा कि झुग्गीवासियों के लिए कंबल, खाने की व्यवस्था के अलावा उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 जनवरी 2016 तय करते हुए शहरी विकास मंत्रालय को भी मामले में पक्ष बनाते हुए कहा कि वह जेजे क्लस्टर के संबंध में अपनी नीति स्पष्ट करे।