सीक्रेट कैमरे में छुपा है महिला IPS व कमीश्नर का राज
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पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क पर दुष्कर्म पीड़िता को नियमों से अलग हटकर लाभ पहुंचाने और बिना अदालत की अनुमति के जांच खोलने का आदेश देने का आरोप है।
जिस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस अपनी रिपोर्ट अदालत को दे चुकी है, उसे बिना अनुमति के नहीं खोला जा सकता है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा ने मंगलवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि जुलाई 2014 में पूर्व डीसी आरपी भारद्वाज के बेटे अजय भारद्वाज पर सुशांत लोक थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था।
जांच रिपोर्ट अदालत में चली गई। जांच में परिवार वालों का दोष नहीं मिला। उस मामले को पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क ने एक आवेदन पर खोल दिया।
सीपी के कमरे में लगे सीक्रेट कैमरे में कैद है सबकुछ
इसके बाद आरोपी अजय भारद्वाज ने पुलिस महानिदेशक से शिकायत की। इसकी जांच भारती अरोड़ा को मिली। जांच के सिलसिले में 23 जुलाई को उन्हें सीपी ने अपने कार्यालय बुलाया। अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने सीपी विर्क से कहा कि यह केस झूठा दर्ज किया गया है।
कम से कम अजय भारद्वाज के परिवार वालों का इसमें कोई मतलब नहीं है। इसके बाद उन्होंने कहा कि इस मामले में 307 क्यों नहीं लगाया। इसका उन्होंने विरोध किया तो सीपी ने उन्हें धमकी दी। उन्होंने कहा कि केस से हट जाओ।
यह पूरी बातचीत सीपी के कमरे में लगे सीक्रेट कैमरे में कैद है। उसे देखा जाए तो पता चलेगा कि आखिर उस दिन इस केस को लेकर उन पर सीपी ने कितना दबाव डाला।
'अकेले में मिलने को कहती थी पीड़िता'
संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा के अनुसार, जब एसीपी दलबीर मामले की जांच कर रहे थे तो शिकायत करने वाली महिला ने उनसे कई बार अकेले में मिलने की बात कही थी। जिसके बाद उन्होंने उक्त जांच किसी महिला अधिकारी से कराने को कहा था।
जांच एसीपी ममता खरब को दी गई। जिसमें उन्होंने साफ तौर पर दुष्कर्म न होने व परिवार वालों को निर्दोष बताया था। यह बात कोर्ट ने कही है।
उधर, सीपी का कहना है कि उन्होंने जो कुछ भी किया नियमों के दायरे में किया। वह इस मामले को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि सामने आना पड़ा।