केजरीवाल ने क्यों कुमार विश्वास की जगह सुशील गुप्ता को दिया राज्य सभा टिकट, ये है असल वजह
पार्टी के भीतर पिछले दो महीने से चल रहा था राज्य सभा चुनाव के लिये मंथन, अलग-अलग विकल्पों पर हुआ विचार, आखिर में तय हुये तीनों नाम
सुशील के नेटवर्क पर आप की नजर
- सुशील गुप्ता के हरियाणा में सामाजिक कार्यों के सहारे जमीन मजबूत करने की तैयारी में आप, टिकट देने की बनी बड़ी वजह
- पार्टी के भीतर पिछले दो महीने से चल रहा था राज्य सभा चुनाव के लिये मंथन
- अलग-अलग विकल्पों पर हुआ विचार, पार्टी के भीतर के नौ नामों पर मचा था घमासान
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पूर्व कांग्रेसी नेता व समाज सेवी सुशील गुप्ता के सहारे आम आदमी पार्टी (आप) की हरियाणा में जनाधार मजबूत करने की तैयारी है। पार्टी के मुताबिक, सुशील गुप्ता ने अपने सामाजिक कार्यों से हरियाणा में मजबूत नेटवर्क खड़ा कर रखा है।
14 जिलों में उनकी शैक्षिक संस्थाएं भी हैं। वहीं, हेल्थ सेक्टर में इनकी मजबूत दखल है। दूसरी तरफ पार्टी ने पिछले दो महीने के मंथन के बाद तीन नामों पर मुहर लगायी है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि क्षेत्र विशेष की नामचीन हस्तियों को राज्य सभा भेजने की रणनीति सफल न होने के बाद पार्टी के भीतर के नामों पर विचार शुरू हुआ।
संजय सिंह के नाम का पार्टी के भीतर कहीं से कोई विरोध नहीं हुआ। लेकिन बाकी नौ नामों, कुमार विश्वास, आशुतोष, पंकज गुप्ता, आतिशी मरलेना, राघव चड्ढा, दिलीप पांडेय, दीपक वाजपेयी, आशीष तलवार व आशीष खेतान, पर एकराय नहीं बन सकी।
15 विधायकों ने बढ़ाया सुशील गुप्ता का नाम
सूत्र बताते हैं कि इस दौरान पार्टी के भीतर लॉबिंग शुरू हो गयी। पार्टी फोरम पर हर नेता को टिकट देने के लिये कुछ लोग खड़े हो जाते। एकबारगी लगा कि हर नेता दूसरे को काट रहा है। आप में इस मसले पर जबरस्त घमासान मच गया था।
पार्टी की सेहत के लिये यह बेहद खतरनाक था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि पार्टी नेता इस तरह बिखरे दिखेंगे। पार्टी के मुताबिक, इसी दौरान एनडी गुप्ता का नाम सामने आया। वहीं, करीब डेढ़ महीने पहले पश्चिमी दिल्ली के करीब 15 विधायकों ने सुशील गुप्ता के नाम की सिफारिश लेकर पहुंचे।
सुशील गुप्ता को आप ने मोती नगर से 2013 में चुनाव लड़ाने की कोशिश की थी। जबकि 2015 के विधान सभा चुनाव में उन्होंने आप विधायक के समर्थन में खुद ही चुनाव नहीं लड़ा था। विधायकों की सिफारिश मिलने पर सुशील गुप्ता के बारे में तहकीकात की गयी।
14 जिलों में काम कर रही उनकी संस्थाएं
एक पदाधिकारी ने बताया कि दिल्ली के अलावा सुशील गुप्ता का हरियाणा में मजबू नेटवर्क है। 14 जिलों में उनकी संस्थाएं काम कर रही है। वहीं, कोई आपराधिक रिकार्ड भी नहीं है। ऐसे में पार्टी ने हरियाणा के लिये पार्टी ने इस नाम को बेहतर माना।
नेटवर्क के अलावा हरियाणा के 15 फीसदी वैश्य मतदाताओं को आप से जोडने पर यह मददगार हो सकते हैं। लिहाजा गुप्ता के नाम पर मुहर लगा दी गयी।