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देशी क्लॉट बस्टर दवा से बचेगी हार्ट अटैक के मरीज की जान

Tue, 05 Feb 2019 06:15 AM IST
राजेश सैनी परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Tue, 05 Feb 2019 06:15 AM IST
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Heart attack patients life will survive with native cluster buster medicine
हृदय रोग

आनुवांशिक और रहन-सहन के कारण आए दिन बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों ने नई योजना तैयार की है। इसके तहत देशी क्लॉट बस्टर दवा से हार्ट अटैक के मरीज की जान बचाई जा सकेगी। ये दवा एम्स के तीन किलोमीटर के दायरे में मौजूद पैरामेडिकल स्टाफ अटैक आने के चंद मिनट बाद मरीज को देगा। इंजेक्शन के जरिये ये दवा शरीर में पहुंचते ही दिल की धमनियों में मौजूद क्लॉट को एकदम से खोलने में मदद मिलेगी। आमतौर पर विदेशों में भी इस तरह की क्लॉट बस्टर दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन भारत ने इस दवा का जेनेरिक रूप तैयार कर लिया है।

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इस जेनेरिक दवा को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) अपने पायलट प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करने जा रहा है। प्रोजेक्ट का नाम है मिशन दिल्ली। इस दिल्ली इमरजेंसी लाइफ हार्ट अटैक पहल के तहत एम्स में एक कंट्रोल रूम स्थापित हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि इसी माह के आखिर तक ये योजना शुरू होने जा रही है। बताया ये भी जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू कर सकते हैं। अभी तक देश में इस तरह की पहल किसी भी राज्य में नहीं हुई है। ऐसा पहली बार है जब हार्ट अटैक के मरीजों के लिए दिल्ली एम्स के बाहर भी उपचार मिलेगा।
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रोज 20 से 30 लोग गंवा रहे हैं जान
दरअसल भारत में पिछले दो दशक के दौरान कार्डियोवास्कुलर बीमारियों का दायरा तेजी से बढ़ा है। स्थिति यह है कि देश में सालाना हो रही मौतों में 60 फीसदी हिस्सेदारी कार्डियोवास्कुलर बीमारियों की है। हार्ट अटैक के चलते समय पर उपचार न मिलने पर हर दिन औसतन 20 से 30 लोगों की मौत हो रही है, जबकि शुरुआती चंद मिनटों में उपचार मिल जाए तो मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इसी उद्देश्य के साथ आईसीएमआर फिलहाल दिल्ली एम्स के आसपास ये पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है।
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बाइक पर दो पैरामेडिकल कर्मचारी रहेंगे
आईसीएमआर के एक वैज्ञानिक ने बताया कि एम्स के तीन किमी के दायरे में इस पहल के तहत बाइक तैनात रहेंगी। इन पर दो पैरामेडिकल कर्मचारी रहेंगे। इस दायरे में मौजूदा डिस्पेंसरी का नंबर चस्पा होगा। हार्ट अटैक आने पर कंट्रोल रूम पर फोन पहुंचने के 10 मिनट के भीतर ही पैरामेडिकल स्टाफ बाइक के जरिये मौके पर पहुंचेगा और जेनेरिक क्लॉट बस्टर दवा देगा।

एम्स के डॉक्टर कैमरे पर देंगे निर्देश
पायलट प्रोजेक्ट की निगरानी समिति में शामिल एक सदस्य ने बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ के कंधों पर लगे वर्चुअल कैमरे की मदद से एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टर स्टाफ को निर्देश देंगे। इसी बीच मौके पर पहुंची कैट्स एंबुलेंस में मरीज को एम्स लेकर एक पैरामेडिकल कर्मचारी पहुंचेगा, जबकि दूसरा कर्मचारी बाइक लेकर वापस डिस्पेंसरी पहुंच जाएगा। आईसीएमआर ने इस प्रोजेक्ट के लिए एम्स व कैट्स एंबुलेंस से करार किया है।

कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए सुविधाएं होना जरूरी : डब्ल्यूएचओ
सोमवार को विश्व कैंसर दिवस को लेकर राजधानी में अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम आयोजित हुए। इस दौरान आईटीओ स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सभागार में कैंसर स्क्रीनिंग को लेकर देश भर में विशेष जांच सुविधाएं मौजूद होने की बात कही गई। संगठन ने सभी देशों से कैंसर की रोकथाम को प्राथमिकता देने वाली नीतियां लागू करने की मांग की।  
दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि 2018 में दुनियाभर में कैंसर के 1.81 करोड़ नए मामले सामने आए, वहीं इस बीमारी से करीब 96 लाख लोगों की मौत हो गई। मृत्यु के मामलों में से 70 प्रतिशत मामले निम्न और मध्य आय वर्ग के देशों से आए। इसे ध्यान में रखते हुए और पूरे क्षेत्र में प्रगति को तेज करने के लिए हर स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं में राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम को शामिल करने की जरूरत है।      

आंखों के विशेषज्ञों ने दी जानकारी      
पदमश्री अवार्डी और सेंटर फॉर साइट सेंटर के चिकित्सा निदेशक डॉ. महिपाल सचदेव ने कहा कि रेटिनोब्लास्टोमा दुनियाभर में बच्चों में सबसे आम प्रकार का आंखों का कैंसर है। भारत में हर साल रेटिनोब्लास्टोमा के 1500 से अधिक मामले सामने आते हैं। इससे आमतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे प्रभावित होते हैं। आई-7 के डॉ. संजय चौधरी ने कहा कि इसके सामान्य लक्षणों में व्हाइट आई रिफ्लेक्स (पुतली का सफेद होना/ ल्यूकोरिया), आंख का असामान्य विचलन (भैंगापन), नजर कमजोर होना, आंख का लाल होना, दर्द होना और उभरी हुई आंखें शामिल हैं। वहीं डॉ. सारिका जिंदल का कहना है कि लगभग 40 प्रतिशत मामलों में यह ट्यूमर माता-पिता से बच्चे में पारित हो सकता है, इसलिए रेटिनोब्लास्टोमा में आनुवंशिक जांच भी महत्वपूर्ण है। रेटिनोब्लास्टोमा का प्रबंधन शुरूआत से ही लंबा सफर तय कर चुका है। इसका फोकस अब जीवन को बचाने से लेकर आंख बचाने पर है और अब इसका फोकस दृष्टि को बचाने पर ही केंद्रित हो गया है।

आयुर्वेद को लेकर भी हुई कार्यशाला
एसडी आयुर्वेदिक कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों के एसोसिएशन की ओर से कैंसर दिवस पर कार्यशाला आयोजित हुई। इस दौरान आप नेता दिलीप पांडेय ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। संयोजक डॉ. मुकेश त्यागी ने बताया कि आयुर्वेद चिकित्सकों ने कैंसर को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं। उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. संजीव शौकीन व डॉ. राजेश छौकर को पुरस्कृत किया गया। विश्व आयुर्वेद परिषद द्वारा रिसर्च मैथडोलॉजी इन आयुर्वेद विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला में द्वारका स्थित भास्कराचार्य कॉलेज में आयुर्वेद विशेषज्ञों ने कैंसर शोध पर चर्चा की।

फोर्टिस अस्पताल हुआ रंगीन
कैंसर दिवस पर देर शाम को फोर्टिस अस्पताल बसंतकुंज को रोशनी से जगमग किया गया। गुलाबी रोशनी में डूबे अस्पताल ने महिलाओं में बढ़ते स्तन व गर्भाश्य कैंसर के प्रति जागरूकता लाने की अपील की। साथ ही कैंसर मरीजों को बीमारी से लड़ने के लिए प्रेरित भी किया।
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