लो फ्लोर बसें बेकार, अगर स्टॉप दिव्यांगों के अनुरूप नहीं: कोर्ट
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कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली सरकार के बयान के बाद की। दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि 2000 लो फ्लोर बसों में से 500 बसें जल्द ही आ जाएंगी। दिल्ली सरकार ने यह भी कहा कि वह स्टैंडर्ड फ्लोर बसों में लिफ्ट लगाने पर भी काम कर रही है, ताकि व्हीलचेयर पर बैठे यात्री इन बसों में आसानी से चढ़ सकें।
दिल्ली सरकार ने कोर्ट के समक्ष कहा कि राजधानी के लिए बसों की भारी जरूरत है और इसलिए 1000 इलेक्ट्रिक स्टैंडर्ड बसों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है और इसके लिए आपूर्तिकर्ता कंपनियों की भी पहचान हो चुकी है। कोर्ट ने एक जून को स्टैंडर्ड फ्लोर बसों की खरीद पर रोक लगा दी थी।
दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता संजोय घोष ने कोर्ट को बताया कि स्टैंडर्ड फ्लोर बसों में लिफ्ट लगाने के लिए टाटा मोटर्स व अशोक लीलैंड से बात की गई है। टाटा मोटर्स सितंबर तक लिफ्ट का मॉडल तैयार कर लेगी।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील से पूछा कि केवल टाटा या अशोक लीलैंड से ही क्यों बात की जा रही है, जबकि इसके लिए दूसरी कंपनियां भी बाजार में मौजूद हैं। इसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा। टेंडर प्रक्रिया में बदलाव क्यों नहीं करती।
कोर्ट के समक्ष दिल्ली सरकार ने कहा कि सरकारी सर्वे के मुताबिक 1690 बस स्टॉप में से 960 बस स्टॉप दिव्यांगों के अनुरूप हैं। इनमें और ज्यादा सुधार के कदम उठाए जा रहे हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के वकील अमन पवार ने कहा कि दिल्ली सरकार डीटीसी बसों के लिए मल्टीलेवल पार्किंग बनाने के लिए कोई काम नहीं कर रही है।