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Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने सत्येंद्र जैन को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका की खारिज
Sun, 21 Aug 2022 01:14 PM IST
विजय पुंडीर
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 21 Aug 2022 01:14 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने आप नेता सत्येंद्र जैन को मानसिक रूप से अक्षम घोषित करने और इस आधार पर उन्हें विधायक और मंत्री पद से हटाने की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
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Delhi high court
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
मनी लॉड्रिंग मामले में गिरफ्तार सत्येंद्र जैन को मंत्री और विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराने संबंधी एक जनहित याचिका (पीआईएल) को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। पीआएल में जैन की मानसिक अस्वस्था को आधार बनाते हुए मंत्री और विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम की पीठप्रसाद ने कहा कि अदालत एक रिट याचिका के आधार पर जैन को विकृत चित्त व्यक्ति या कैबिनेट और विधानसभा के लिए अयोग्य घोषित नहीं कर सकती।
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अदालत ने 16 अगस्त के अपने आदेश में कहा यह सच है कि जैन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के साथ ही धन शोधन रोकथाम कानून के तहत विभिन्न अपराधों के लिए मुकदमों का सामना कर रहा है। दंड प्रक्रिया संहिता-1973 खुद एक पूर्ण संहिता है जिसके तहत पूछताछ, जांच और मुकदमे के संबंध में प्रावधान है। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता में सभी आकस्मिकताएं शामिल हैं और कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी अभियोजन की है।
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उच्च न्यायालय ने कहा कि रिट याचिका में कही बातों के आधार पर न्यायालय भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायाधिकार का इस्तेमाल करते हुए जैन को मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति घोषित नहीं कर सकती और ना ही उन्हें विधानसभा या दिल्ली सरकार में मंत्री पद के लिए अयोग्य ठहरा सकती है। इसलिए रिट याचिका खारिज की जाती है।
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याचिकाकर्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जैन ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष अपनी याददाश्त खो देने की बात कही थी और इसकी जानकारी निचली अदालत को भी जानकारी दी गई है। इसलिए एक विधायक के तौर पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। ईडी ने 30 मई को जैन को गिरफ्तार किया था।