कूड़ादान चुराने पर होगा दिनदहाड़े डकैती केस
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दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में कूड़ा इकट्ठा करने के लिए जगह-जगह लगे डस्टबिन के गायब होने को दिनदहाड़े डकैती करार दिया। मामले में अदालत ने तीनों एमसीडी व नई दिल्ली पालिका परिषद को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आखिर डस्टबिन कैसे गायब हो गए।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ ने बुधवार को कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि राजधानी को साफ रखने के लिए बनाई गई योजना के तहत जगह-जगह दो तरह के डस्टबिन लगाए गए थे ताकि लोग सड़क की अपेक्षा उनमें कूड़ा डाले।
अदालत ने कहा कि यह काफी हैरानी करने की बात है अधिकांश डस्टबिन गायब हैं और एमसीडी व अन्य संस्थाएं चुप हैं। खंडपीठ ने कहा क्या इसी प्रकार साफ सफाई होगी। अदालत ने तीनों एमसीडी व परिषद को अपना जवाब 21 जनवरी तक पेश करने का निर्देश दिया है।
तीनों एमसीडी-एनडीएमसी को नोटिस जारी
अदालत ने सभी को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उनके अधिकार क्षेत्र वाले क्षेत्रों में कितने डस्टबिन लगाए गए थे और अब कितने बचे हैं। इसके अलावा कूड़े को गिराने के लिए कितने ढलाव हैं और ढलाव व डस्टबिन से कूड़ा उठाने में कितने ट्रक लगाए गए हैं।
इसके अलावा कूड़ा उठाने में कितनी साइकिल रिक्शा लगी हैं। अदालत ने एमसीडी के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हर राजधानीवासी की एमसीडी से यही समस्या है कि सफाई नहीं हो रही। अदालत ने कहा कि एमसीडी काम नहीं कर रही है। हर योजना की शुरुआत धूमधाम से होती है और फोटो खिंचवाई जाती है लेकिन उसके बाद कुछ नहीं होता।
खंडपीठ ने शरद तिवारी व संजीव अग्निहोत्री द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याची के अधिवक्ता सुग्रीव दुबे ने अदालत को बताया कि राजधानी को साफ रखने के लिए एक कंपनी से 10 हजार डस्टबिन खरीदकर लगाए गए थे लेकिन सभी डस्टबिन को हटाकर दूसरे राज्यों में लगा दिया गया है। यह बड़ा घोटाला है। इसके अलावा कूड़ा उठाने वाले अधिकांश ट्रक बेकार पड़े हैं।