फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   hastily imposed treason case on Kanhaiya Kumar

'कन्हैया के भाषण में देशद्रोह जैसा कुछ नही'

Wed, 17 Feb 2016 12:42 PM IST
Updated Wed, 17 Feb 2016 12:42 PM IST
विज्ञापन
hastily imposed treason case on Kanhaiya Kumar

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर शुरू में सख्त रुख अपनाने वाली केंद्र सरकार अब बैक फुट पर आती दिख रही है।

विज्ञापन


दरअसल, इस पूरे मामले में खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी अंदरूनी रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया पर देशद्रोह का मुकदमा लगाने में जल्दबाजी की।
विज्ञापन


कन्हैया के भाषण की रिकार्डिंग में देशद्रोह जैसा कोई बयान या नारेबाजी नहीं है। ऐसे में गृह मंत्रालय छात्र नेता की गिरफ्तारी पर अब गंभीरता से गौर कर रहा है। गृहमंत्री ने देशद्रोह के मुकदमे के कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों से सलाह लेने को कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कन्हैया की गिरफ्तारी अब दिल्ली पुलिस और अदालत के बीच का मसला

hastily imposed treason case on Kanhaiya Kumar

जेएनयू की घटना को हाफिज सईद से जोड़ने वाले बयान से दबाव में आए राजनाथ सिंह इस मामले की पल-पल की खबर रख रहे हैं। उच्च पदस्थ अधिकारी ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि हालांकि कन्हैया की गिरफ्तारी अब दिल्ली पुलिस और अदालत के बीच का मसला हो गया है।

अंदरूनी चर्चा में यह बात कही गई है कि दरअसल गिरफ्तारी कुछ अन्य लोगों की होनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस ने कन्हैया को गिरफ्तार कर गलती कर दी है।

बुधवार को कन्हैया की रिमांड के बाद पेशी होनी है। उधर, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई का समय बुधवार को ही तय करेगा। आईबी की अंदरूनी रिपोर्ट के मुताबिक सीपीआई (माओवाद) का छात्र फ्रंट संस्था डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) कुछ कश्मीरी संगठनों से जुड़ गया है।

कन्हैया का इस घटना के जुड़ा होना तर्कसंगत नहीं लगता।

hastily imposed treason case on Kanhaiya Kumar

यह संगठन जेएनयू कैंपस में हर साल इस तरह की नारेबाजी करता है। अब इसका साथ कमेटी फॉर रिलीज ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर नाम की संस्था दे रही है।


इस संस्था के नेता अक्सर नक्सलवाद के समर्थक होते हैं। लेकिन फिलहाल इसकी देखरेख इसी मामले में गिरफ्तार लेक्चरर एसएआर गिलानी कर रहे हैं।

आईबी की दलील है कि कन्हैया कुमार भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के छात्र संगठन का नेता है। चूंकि सीपीआई (माओवादी) और सीपीआई सैद्धांतिक तौर पर कभी भी एक साथ काम नहीं कर सकती। लिहाजा कन्हैया का इस घटना के जुड़ा होना तर्कसंगत नहीं लगता।

जेएनयू विवाद में सरकार को खली मैनेजरों की कमी

hastily imposed treason case on Kanhaiya Kumar

भाजपा के शीर्ष नेताओं ने जेएनयू विवाद से निपटने में हुई रणनीतिक चूक की बात मानी है। उन्हें लगता है कि सरकार के शीर्ष मंत्रियों के खुलकर सामने आए बिना भी विवाद पर अन्य माध्यमों से सियासी पकड़ बनाई जा सकती थी।


पार्टी रणनीतिकारों को एक बार फिर से सरकार में राजनीतिक मैनेजरों का अभाव नजर आया है। उन्हें इस बात का अहसास है कि जेएनयू मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन या अन्य माध्यमों के जरिए इससे बेहतर तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता था।

बजट सत्र से पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में जेएनयू विवाद की गूंज सुनाई दी। विपक्ष की ओर से छात्र नेता कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार करने पर उठाए गए सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि वह किसी पार्टी के नेता के तौर पर नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री के रूप में इस मामले में फैसला करेंगे। कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने छात्र नेता कन्हैया की गिरफ्तारी का मामला उठाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed