सीवीओ मामले में फूटा हर्षवर्धन का गुस्सा!
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के चीफ विजलेंस ऑफिसर (सीवीओ) की ओर से मंत्रालय को लिखे गए पत्र पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि यदि उन्हें खतरा था तो पुलिस के पास जाना चाहिए था। यदि पुलिस मदद नहीं करती तब वे इस मामले में गृहमंत्री से बात करते।
एमसीआई सीवीओ ने यह कहते हुए मूल कैडर में भेजने का आग्रह स्वास्थ्य मंत्रालय से किया था कि उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने पर परेशान किया जा रहा है, लिहाजा उन्हें उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया जाए।
एम्स के सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को हटाए जाने के मामले में आरोप झेलने वाले स्वास्थ्य मंत्री के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है।
क्या हैं सीवीओ के आरोप?
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि यदि एमसीआई के सीवीओ एचके जेठी को किसी तरह का खतरा था तो उन्हें पुलिस से मदद मांगनी चाहिए थी। स्वास्थ्य मंत्री ऐसे मामले में सुरक्षा कैसे प्रदान कर सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि वे तीन बार अपने मूल कैडर में वापस जाने के लिए पत्र लिख चुके थे, ऐसे में उन्हें जबरदस्ती रोक कर नहीं रखा जा सकता था। इसी वजह से उनके आग्रह को आगे की कार्रवाई के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय को भेज दिया गया था।
दरअसल, एमसीआई के सीवीओ एचके जेठी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिख कर कहा था कि एमसीआई में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्य करने पर उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
एमसीआई में काम करने में कोई सहयोग नहीं मिल रहा है और उन्हें यहां खतरा भी है, क्योंकि प्रताड़ित किया जा रहा है। इसलिए मूल कैडर भेजने का आग्रह किया था। लेकिन फिलहाल केंद्रीय सतर्कता आयोग ने इस पर रोक लगा दी है।